Expose Now Exclusive: बाड़मेर शिक्षा विभाग में करोड़ों का ‘कागजी’ खेल, बिना सामान पहुंचे डकार गए 59.78 लाख, रसूखदार घिरे!

-बिना वर्क ऑर्डर और अप्रूवल नोटशीट के हुआ भुगतान, कनिष्ठ लेखाकार की रिपोर्ट से ‘समग्र शिक्षा’ में मचे हड़कंप का सबसे बड़ा खुलासा

-स्वीकृति पत्र में नाम ‘A’ फर्म का, बैंक खाते में पैसे ‘B’ फर्म के पहुंचे, सरकारी खजाने में सेंध लगाने के लिए बनाई गईं फर्जी इनर शीट (कूटरचित दस्तावेज)

-केंद्रीय मंत्री के करीबी और एडीपीसी (ADPC) कृष्ण सिंह महेचा पर उंगली, कनिष्ठ लेखाकार जगदीश कुमार ने जयपुर भेजी पूरी कुंडली

बाड़मेर/जयपुर। प्रदेश के सीमावर्ती बाड़मेर जिले के शिक्षा विभाग से बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। बच्चों की पढ़ाई और व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Education) के नाम पर सरकारी खजाने को किस बेरहमी से लूटा जाता है, इसका एक सनसनीखेज लाइव उदाहरण ‘समग्र शिक्षा अभियान’ (Samagra Shiksha) के बाड़मेर कार्यालय में देखने को मिला है। ‘Expose Now’ के हाथ लगे पुख्ता आधिकारिक दस्तावेजों से साफ हुआ है कि बिना किसी सामान की डिलीवरी के, नियमों को ताक पर रखकर कुल 59,78,852 (करीब 60 लाख रुपये) का फर्जी और अनियमित भुगतान (गबन) कर दिया गया है।

इस पूरे खेल का पर्दाफाश किसी बाहरी एजेंसी ने नहीं, बल्कि विभाग के ही कनिष्ठ लेखाकार (Junior Accountant) जगदीश कुमार ने अपनी आंतरिक जांच के बाद सीधे राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद (जयपुर) के राज्य परियोजना निदेशक को पत्र लिखकर किया है। इस खुलासे के बाद से शिक्षा विभाग की आलाअधिकारी लॉबी में हड़कंप मचा हुआ है।

घोटाले की ‘इनसाइड स्टोरी’, देखें किस बिल में कैसे बही भ्रष्टाचार की गंगा:-

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, 59,78,852 की इस राशि को मुख्य रूप से 5 बड़े फर्जी ट्रांजैक्शन के जरिए ठिकाने लगाया गया, जिनका विवरण इस प्रकार है:

-पहला फर्जीवाड़ा (बिल संख्या 248 / स्वीकृति 457): इस बिल के तहत 9,68,673 की राशि स्वीकृत की गई थी। कागज पर असली नाम HUMAN WELFARE ORG. दर्ज था, लेकिन बैंक खाते में पैसे चुपचाप RAMNEER INFRA PROJECT को ट्रांसफर कर दिए गए।

-दूसरा फर्जीवाड़ा (बिल संख्या 248 / स्वीकृति 458): इस ट्रांजैक्शन में कुल 10,48,474 का खेल हुआ। वित्तीय स्वीकृति INDIAN INSTITUTE OF SKILL DEVELOPMENT के नाम पर जारी हुई, मगर भुगतान BORDER EDU AND RES SOC नाम की दूसरी फर्म को कर दिया गया।

-तीसरा फर्जीवाड़ा (बिल संख्या 248 / स्वीकृति 459): यहां सबसे बड़ी रकम यानी 17,26,372 ठिकाने लगाई गई। स्वीकृति आदेश में नाम TIMES CENTER FOR LEARNING का था, लेकिन खजाने से राशि GSM SURAJMAL WALA को ट्रांसफर कर दी गई।

-चौथा फर्जीवाड़ा (बिल संख्या 249 / स्वीकृति 460): इस बिल के जरिए 5,37,238 की राशि का गबन किया गया। स्वीकृत दस्तावेज में फर्म का नाम BHAGINI NIVEDITA था, जबकि भुगतान KARTIK ENT को पहुंचा दिया गया।

-पांचवां फर्जीवाड़ा (बिल संख्या 249 / स्वीकृति 461): इस आखिरी ट्रांजैक्शन में 16,98,095 का चूना लगाया गया। कागज पर असली फर्म CENTURIAN UNIVERSITY OF TECH AND MANAG. थी, लेकिन पैसा सीधे NATION FIRST ENT के खाते में भेज दिया गया।

नोट: दस्तावेजों के अनुसार, जिन दूसरी फर्मों को सीधे करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए, उनका कार्यालय रिकॉर्ड में कोई पुराना बकाया (Liability) शेष ही नहीं था! यानी सीधे तौर पर नया खेल रचा गया।

अतिरिक्त मुख्य सचिव तक पहुंची शिकायत, रिकवरी और केस दर्ज करने की मांग:-

मामले की गंभीरता को देखते हुए कनिष्ठ लेखाकार ने पत्र की प्रतिलिपियां सीधे अतिरिक्त मुख्य सचिव महोदय (शिक्षा विभाग, राजस्थान) और वित्तीय सलाहकार (जयपुर) को भी सादर प्रेषित कर दी हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर साक्ष्यों को नष्ट न किया जा सके। पत्र में साफ तौर पर लिखा गया है कि प्रथम दृष्टया यह “गबन और अनियमित भुगतान” का गंभीर मामला है, इसलिए तत्काल उच्च स्तरीय अग्रिम जांच करवाकर दोषियों से राजकोष के पैसे की रिकवरी की जाए और आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।

राजनीतिक रसूक के चलते इधर-उधर घूम रही है जांच की फाइल:-

सूत्रों और स्थानीय गलियारों में चल रही चर्चाओं की मानें तो इस पूरे सिंडिकेट के पीछे अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (ADPC) कृष्ण सिंह महेचा की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध मानी जा रही है, क्योंकि रोकड़पाल और संबंधित विंग सीधे उन्हीं के अधीन कार्य करते हैं। चर्चा यह भी है कि संबंधित अधिकारी एक बेहद प्रभावशाली केंद्रीय मंत्री के बेहद खास सिपहसालार हैं। इसी राजनीतिक रसूख के दम पर लंबे समय से नियमों को ताक पर रखकर फाइलों को इधर से उधर घुमाया जा रहा था।

अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ‘जीरो टॉलरेंस’ सरकार इस भारी भ्रष्टाचार पर क्या एक्शन लेती है? क्या राजनीतिक रसूखदार अधिकारियों को बचाया जाएगा या फिर बाड़मेर के बच्चों के हक का पैसा डकारने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now

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