जयपुर। राजस्थान सरकार ने प्रदेश में वित्तीय संसाधनों के कुशल प्रबंधन और सार्वजनिक व्यय में अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त कदम उठाया है । राज्य के वित्त विभाग (आय-व्ययक अनुभाग) ने 22 मई 2026 को एक परिपत्र जारी कर सरकारी खर्चों में कटौती करने, फिजूलखर्ची रोकने और पर्यावरण व ऊर्जा संरक्षण को लेकर कई कड़े निर्देश दिए हैं । प्रमुख शासन सचिव (वित्त), वैभव गालरिया द्वारा जारी इस आदेश के तहत अब सरकारी खर्चे पर की जाने वाली विदेश यात्राओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है ।
काफिले में घटेंगी गाड़ियां और ई-व्हीकल्स पर रहेगा जोर
सरकार ने वीआईपी कल्चर पर लगाम कसते हुए स्पष्ट किया है कि माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा अपने कारकेड (काफिले) में वाहनों की संख्या सीमित कर दी गई है । इसी तर्ज पर अब सभी मंत्रियों, निगमों और आयोगों के पदाधिकारियों को भी अपने काफिले में केवल अति-आवश्यक न्यूनतम वाहनों का ही उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं । इसके साथ ही, प्रदूषण कम करने की दिशा में सभी सरकारी पेट्रोल और डीजल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों (ई-व्हीकल) में बदला जाएगा । प्रथम चरण में जिन अधिकारियों का कामकाज मुख्य रूप से शहर के भीतर रहता है, उनके लिए केवल ई-व्हीकल ही खरीदे जाएंगे । संविदा पर लिए जाने वाले वाहनों में भी ई-व्हीकल को प्राथमिकता दी जाएगी । प्रदेश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना के लिए समयबद्ध कार्य योजना तैयार कर लंबित प्रस्तावों को जल्द अनुमोदित किया जाएगा । अधिकारियों को एक ही गंतव्य पर जाने के लिए ‘कार पूलिंग’ करने की भी सलाह दी गई है ।
राजकीय भवनों में होंगे कार्यक्रम, ई-ऑफिस को मिलेगा बढ़ावा
सरकारी कार्यप्रणाली को पूरी तरह से डिजिटल और मितव्ययी बनाने के लिए आदेश दिए गए हैं कि विभागों और स्वायत्तशाषी संस्थाओं के सभी शासकीय आयोजन अब केवल राजकीय भवनों में ही किए जाएं । बैठकों का आयोजन भी भौतिक रूप से करने के बजाय यथासंभव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया जाएगा । सरकारी दफ्तरों के बीच फाइलों के आदान-प्रदान के लिए ई-ऑफिस और ई-फाइल का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा तथा भौतिक पत्राचार की जगह ‘राज-काज पोर्टल’ को प्राथमिकता दी जाएगी । अधिकारियों और कर्मचारियों को अब भौतिक प्रशिक्षण की जगह यथासंभव ‘iGOT कर्मयोगी पोर्टल’ के माध्यम से ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा ।
ऊर्जा की बचत और कृषि नवाचारों पर विशेष फोकस
ऊर्जा संरक्षण को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राजकीय भवनों में बिजली उपभोग के लिए सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना सुनिश्चित की जाएगी । कार्यालय समय के दौरान बिजली का उपयोग मितव्ययता से करने और दफ्तर के बाद सभी विद्युत उपकरणों को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं । ऊर्जा विभाग को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ‘पी.एम. सूर्यघर योजना’ को प्राथमिकता देने को कहा गया है । वहीं, कृषि विभाग को प्राकृतिक व टिकाऊ खेती (Natural organic and sustainable agriculture) को प्रोत्साहन देने, एग्री-स्टैक के पंजीयन और यूरिया के गैर-कृषि उपयोग को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं ।
सब पर लागू होंगे नियम, विभागाध्यक्ष होंगे जिम्मेदार
वित्त विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि व्यय नियंत्रण के इन दिशा-निर्देशों की कठोरता से अनुपालना सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक विभाग के प्रभारी सचिव और विभागाध्यक्ष की होगी । यह नियम केवल सरकारी विभागों पर ही नहीं, बल्कि राजकीय उपक्रमों, कंपनियों, बोर्ड्स, विश्वविद्यालयों, अनुदानित संस्थाओं और राज्य सरकार पर वित्तीय रूप से निर्भर सभी निकायों पर समान रूप से लागू होंगे । संस्था प्रधान और मुख्य कार्यकारी अधिकारी इन आदेशों की पालना के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे । केवल अति-आवश्यक प्रकरणों में ही विभागों से पूर्ण औचित्य के साथ प्रस्ताव प्राप्त होने पर वित्त विभाग द्वारा इन प्रतिबंधों में शिथिलन (छूट) दिया जा सकेगा ।