कोटा के बोरखेड़ा क्षेत्र में बाइक सहित खुले नाले में गिरने से रिटायर्ड प्रिंसिपल की दर्दनाक मौत के मामले में कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) ने सख्त कार्रवाई की है। इस गंभीर लापरवाही के मामले में केडीए ने अपने तीन इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही, निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे ठेकेदार पर 17.23 लाख रुपए की भारी-भरकम पेनल्टी लगाते हुए उसे छह महीने के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। केडीए सचिव मुकेश चौधरी ने बताया कि हादसे के बाद 22 मई को एक जांच टीम का गठन कर पूरे प्रकरण की जांच कराई गई थी, जिसकी शुरुआती रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि इस जानलेवा हादसे का मुख्य कारण घोर लापरवाही है।
इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार माने गए अधिकारियों में एग्जिक्यूटिव इंजीनियर सागर मीणा, असिस्टेंट इंजीनियर लालचंद मटोरिया और जूनियर इंजीनियर विनोद मण्डावत शामिल हैं, जिन्हें तुरंत प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसके अलावा, ठेकेदार फर्म मेसर्स इंजीनियर नरेन्द्र कुमार गुप्ता को आगामी छह महीने तक के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। साथ ही, कार्यादेश की शर्तों का पालन नहीं करने और सुरक्षा में कोताही बरतने पर फर्म पर 17,23,712 रुपए का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है।

बोरखेड़ा क्षेत्र के खुले नाले में गिरने से रिटायर्ड प्रिंसिपल की मौत के बाद से ही शहरवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि यह नाला लंबे समय से खुला पड़ा था और वहां सुरक्षा के कोई पर्याप्त इंतजाम या बैरिकेडिंग नहीं की गई थी। इस दुखद हादसे ने शहर में चल रहे विकास कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों की हो रही लगातार अनदेखी को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जनता के आक्रोश और मामले की गंभीरता को देखते हुए केडीए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। केडीए ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी विकास कार्यों में सुरक्षा संबंधी मानकों की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही, आला अधिकारियों को समय-समय पर साइट का औचक निरीक्षण करने और सुरक्षा उपायों की कड़ी निगरानी करने के लिए भी पाबंद किया गया है।
गौरतलब है कि कोटा के बोरखेड़ा थाना क्षेत्र की गोकुल कॉलोनी स्थित एक खुले नाले में बाइक सहित गिरने से 60 वर्षीय रिटायर्ड प्रिंसिपल रामेश्वर रावत की मौत हो गई थी। 21 मई की सुबह करीब 10 बजे उनकी लाश नाले में बाइक के नीचे दबी हुई मिली थी। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकलवाकर एमबीएस अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। बाद में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया था।