SI भर्ती-2021 पुन: परीक्षा पर राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: परीक्षा में अनुपस्थित रहे अभ्यर्थियों को भी मिलेगा बैठने का मौका

जयपुर। राजस्थान की सबसे चर्चित और कानूनी दांवपेचों में फंसी सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 को लेकर बुधवार को राजस्थान हाईकोर्ट से एक ऐसा बड़ा और ऐतिहासिक आदेश आया है, जिसने इस परीक्षा की पूरी स्क्रिप्ट को एक नया मोड़ दे दिया है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) जो अब तक केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा में बैठने की अनुमति दे रहा था जिन्होंने साल 2021 की मुख्य परीक्षा के दोनों पेपर दिए थे, उसे कोर्ट ने कड़ा सबक सिखाया है।

जस्टिस आनंद शर्मा की अदालत ने प्रश्नजीत सिंह, देवेंद्र सैनी, मधुसूदन शर्मा और अन्य अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आरपीएससी को सख्त निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ताओं को तुरंत अपने ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म एडिट करने का चांस दें और उन्हें प्रोविजनल (अंतिम) तौर पर आगामी परीक्षा में शामिल करें।

क्या था पूरा विवाद और RPSC का मनमाना नियम?

इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ आरपीएससी द्वारा 8 मई 2026 को जारी किया गया एक प्रेस नोट था। इस प्रेस नोट में आयोग ने एक अजीब शर्त रखते हुए केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को 16 मई से 30 मई 2026 तक अपने आवेदन फॉर्म में संशोधन (Edit) करने का मौका दिया था, जो 13 से 15 सितंबर 2021 के बीच आयोजित हुई लिखित परीक्षा के दोनों प्रश्न पत्रों में उपस्थित रहे थे।

याचिकाकर्ताओं का तर्क और भेदभाव का आरोप:

अभ्यर्थियों ने अपने वकीलों के माध्यम से कोर्ट को बताया कि उन्होंने साल 2021 में प्रामाणिक रूप से फॉर्म भरा था और फीस भी जमा की थी, लेकिन किसी व्यक्तिगत या अपरिहार्य कारणों से वे दोनों पेपर नहीं दे पाए थे। अभ्यर्थियों का पक्ष था कि जब सरकार धांधली के कारण पूरी पुरानी भर्ती को ही रद्द करके बिल्कुल नए सिरे से दोबारा परीक्षा (Re-Exam) करवा रही है, तो पुराने सभी रजिस्टर्ड आवेदकों को मौका मिलना चाहिए। सिर्फ आधे पेपर देने वालों को ही चुनना सरासर भेदभावपूर्ण और गलत है।

RPSC की दलीलें कोर्ट में हुईं ‘धड़ाम’

सुनवाई के दौरान राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के वकीलों ने कोर्ट के सामने हाथ खड़े करते हुए अपनी प्रशासनिक लाचारी व्यक्त की थी। आरपीएससी ने दलील दी कि अगर वे सभी आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को इस पुन: परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देते हैं, तो उनके सामने एक बहुत बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा हो जाएगा।

आरपीएससी ने अदालत में ये 3 मुख्य दलीलें रखी थीं:

  • बड़ी संख्या: “4 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्होंने साल 2021 में केवल एप्लीकेशन फॉर्म भरा था, लेकिन वे परीक्षा देने नहीं आए थे।”
  • छंटनी की सिरदर्दी: “अगर इन सभी 4 लाख से अधिक लोगों को दोबारा अलाऊ किया जाता है, तो हमें इनके डॉक्यूमेंट्स और फॉर्म की अतिरिक्त छंटनी (Scrutiny) करनी होगी, जो इस समय बेहद मुश्किल और जटिल कार्य है।”
  • नौकरी और पढ़ाई छोड़ना: “इन 4 वर्षों के लंबे अंतराल में कई अभ्यर्थी कहीं और नौकरी लग चुके होंगे या तैयारी छोड़ चुके होंगे, इसलिए इन्हें बाहर रखना ही सही है।”

हाईकोर्ट का रुख: हाईकोर्ट ने आरपीएससी की इस प्रशासनिक कठिनाई की दलील को पूरी तरह से खारिज कर दिया और कहा कि केवल अपनी प्रशासनिक व्यवस्था की दुहाई देकर योग्य अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों को नहीं छीना जा सकता।

सीनियर एडवोकेट्स ने दीं पुरानी भर्तियों की मिसालें

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट्स— रघुनंदन शर्मा, रामप्रताप सैनी, निखिल कुमावत और रविंद्र सैनी ने कोर्ट के सामने समानता के अधिकार का सबसे मजबूत पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आरपीएससी का यह फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (अवसर की समानता) का सीधा उल्लंघन है। इसके समर्थन में उन्होंने राजस्थान की ही पुरानी रद्द हुई दो बड़ी भर्तियों के उदाहरण कोर्ट के सामने पेश किए:

  1. EO-RO भर्ती का उदाहरण: इस भर्ती परीक्षा के रद्द होने के बाद जब दोबारा एग्जाम हुआ, तो उन सभी लोगों को परीक्षा में बिठाया गया जिन्होंने सिर्फ फॉर्म भरा था, चाहे वे पहली बार एग्जाम में आए हों या नहीं।
  2. LDC भर्ती का नियम: एलडीसी भर्ती में भी यही समान नियम अपनाया गया था। वकीलों ने कहा कि जब उन भर्तियों में सभी आवेदनकर्ताओं को दोबारा मौका मिला, तो फिर एसआई भर्ती-2021 की पुन: परीक्षा में यह दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है?

SI भर्ती-2021 का पूरा डेटा शीट (आंकड़ों का खेल)

इस पूरी भर्ती के गणित को देखें तो समझ आता है कि आरपीएससी आखिर क्यों इतने बड़े वर्ग को परीक्षा से बाहर रखने की जिद पर अड़ा हुआ था:

विवरण (Description)अभ्यर्थियों की कुल संख्या (Total Candidates)
कुल आवेदन करने वाले अभ्यर्थी (Total Applied)7,95,000+ (करीब 7.95 लाख)
2021 की मुख्य परीक्षा में बैठने वाले (Both Papers)3,83,097 (करीब 3.83 लाख)
परीक्षा छोड़ देने वाले अभ्यर्थी (Absent Candidates)4,11,903 (करीब 4.11 लाख)
RPSC द्वारा पहले स्वीकृत अभ्यर्थीकेवल 3,83,097 अभ्यर्थी
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद राहतयाचिकाकर्ताओं को फॉर्म एडिट और प्रोविजनल एंट्री मिली

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला, जानिए पूरी टाइमलाइन

यह एसआई भर्ती-2021 राजस्थान के इतिहास की सबसे विवादित भर्तियों में से एक बन चुकी है। पेपर लीक और डमी कैंडिडेट के आरोपों के बाद यह मामला लगातार अदालतों के चक्कर काट रहा है:

  • 28 अगस्त 2025: राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कथित धांधली के कारण इस पूरी एसआई भर्ती-2021 को रद्द (Cancel) करने का आदेश दिया था।
  • 4 अप्रैल 2026: हाईकोर्ट की खंडपीठ (Division Bench) ने एकलपीठ के फैसले को सही ठहराते हुए भर्ती रद्द रखने के आदेश को बरकरार रखा।
  • 4 मई 2026: ट्रेनिंग ले रहे चयनित सब-इंस्पेक्टर्स इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, लेकिन जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने उनकी स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) को सिरे से खारिज कर दिया, जिससे दोबारा परीक्षा का रास्ता साफ हो गया।

अन्य अभ्यर्थियों के लिए भी खुल सकते हैं रास्ते

हालांकि राजस्थान हाईकोर्ट का यह आदेश अभी केवल ‘याचिकाकर्ताओं’ के लिए एक अंतरिम राहत के रूप में आया है, लेकिन कानूनी जानकारों का मानना है कि इस फैसले के आधार पर आने वाले दिनों में उन सभी 4.11 लाख अभ्यर्थियों के लिए भी रास्ते पूरी तरह खुल सकते हैं जो साल 2021 में परीक्षा नहीं दे पाए थे। आरपीएससी को अब अपने ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी बदलाव करने होंगे ताकि कोर्ट के आदेशानुसार याचिकाकर्ताओं को 30 मई की अंतिम तिथि से पहले अपने फॉर्म एडिट करने का मौका मिल सके। भीषण गर्मी के इस समर सीजन में राजस्थान के बेरोजगारों के लिए यह अदालती फैसला एक बहुत बड़ी संजीवनी साबित होने वाला है।

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