EXPOSE NOW SPECIAL: ‘ग्रेस’ से पास होने वाले बने डॉक्टर? नीट-2025 की सुचिता पर बिवाल परिवार ने खड़े किए बड़े सवाल !

-कोचिंग टेस्ट में औसत, मुख्य परीक्षा में ‘टॉपर’: आखिर बिवाल परिवार की सफलता का रहस्य क्या?
-सिस्टम की आंखों में धूल? नीट परीक्षा के दावों की पोल खोलती एक खास रिपोर्ट

जयपुर। नीट (NEET) परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता एक बार फिर संदेह के घेरे में है। इस बार केंद्र में है जयपुर के जमवारामगढ़ का ‘बिवाल परिवार’। परिवार के पांच बच्चों ने एक साथ सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेकर सबको चौंका दिया है, लेकिन जब उनकी पिछली मार्कशीट खंगाली गई, तो जो सच सामने आया वह होश उड़ाने वाला है।

  1. ऋषि: फिजिक्स-केमिस्ट्री में ‘फेल’ जैसे नंबर, फिर भी नीट पार!

सबसे बड़ा सवाल ऋषि की योग्यता पर उठ रहा है। कथित तौर पर जिसके लिए पेपर खरीदने के आरोप लग रहे हैं, उसकी 12वीं की मार्कशीट उसकी शैक्षणिक असलियत बयां कर रही है:

-परिणाम: सेकंड डिवीजन (वो भी ग्रेस अंकों के सहारे)।

-थ्योरी स्कोर (कुल 56 में से): * फिजिक्स: 09 अंक

-केमिस्ट्री: 15 अंक

-बायोलॉजी: 20 अंक

सवाल: जो छात्र बोर्ड परीक्षा में विज्ञान के विषयों में न्यूनतम पासिंग मार्क्स के लिए संघर्ष कर रहा हो, उसने देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सरकारी सीट कैसे हासिल कर ली?

  1. बिवाल परिवार के अन्य 5 बच्चों का ‘चमत्कारी’ ग्राफ विश्लेषण:-

मार्कशीट के आंकड़ों का गहराई से अध्ययन करें तो विकास, प्रगति, गुंजन, सानिया और पलक की सफलता के पीछे कई तकनीकी संदेह नजर आते हैं:

विकास: 12वीं में मात्र 55% लेकिन मेडिकल में सीट:-

विकास ने 12वीं में केवल 55% अंक प्राप्त किए थे। नीट-2024 में उसका स्कोर 720 में से मात्र 270 था। सीकर की कोचिंग में दिए गए 46 टेस्ट्स में भी उसका औसत प्रदर्शन काफी कमजोर रहा, फिर भी नीट-2025 में 85.11 परसेंटाइल लाकर उसने सवाई माधोपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला पा लिया।

प्रगति: नीट-2024 और 2025 के स्कोर में भारी अंतर:-

प्रगति का नीट-2024 का स्कोर मात्र 332 अंक था। कोचिंग के टेस्ट में भी उसका औसत 302 नंबर ही रहा। लेकिन नीट-2025 में अचानक 89.08 परसेंटाइल हासिल कर उसने दौसा के सरकारी कॉलेज में अपनी जगह पक्की कर ली।

गुंजन: औसत छात्र से ‘सरकारी डॉक्टर’ तक का सफर:-

गुंजन ने 12वीं में 70% अंक प्राप्त किए थे और नीट-2024 में उसका स्कोर 355 था। कोचिंग में भी उसका औसत प्रदर्शन 320 से 342 अंकों के बीच ही सिमटा रहा। इसके बावजूद नीट-2025 में 92.53 परसेंटाइल का उछाल किसी आश्चर्य से कम नहीं है।

सानिया: टेस्ट में फिसड्डी, मुख्य परीक्षा में टॉपर:-

सानिया का रिकॉर्ड बताता है कि कोचिंग के 49 टेस्ट्स में उसका औसत स्कोर 341 से 361 के बीच था, जो सरकारी सीट के लिए नाकाफी है। लेकिन नीट-2025 के मुख्य परिणाम में उसने 94.07 परसेंटाइल हासिल कर सरकारी कॉलेज में प्रवेश लिया।

पलक: जयपुर के टॉप कॉलेज में ‘संदिग्ध’ एंट्री:-

पलक का मामला सबसे चौंकाने वाला है। नीट-2024 में उसने 512 अंक प्राप्त किए थे। हालांकि वह शुरू से बेहतर थी, लेकिन नीट-2025 में उसका स्कोर सीधे 98.61 परसेंटाइल पर पहुँच गया, जिससे उसे जयपुर का प्रतिष्ठित सरकारी कॉलेज मिल गया।

इन सभी बच्चों में एक बात समान है—सीकर की कोचिंग के इंटरनल टेस्ट्स में इनका प्रदर्शन कभी भी ‘एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी’ नहीं रहा, लेकिन मुख्य नीट परीक्षा के दिन इन सभी ने एक साथ ‘चमत्कारी’ स्कोर हासिल किया। क्या यह महज इत्तेफाक है या किसी संगठित सेटिंग का हिस्सा?

संदेह के घेरे में क्यों है यह सफलता?

अचानक उछाल: अधिकांश बच्चों का नीट-2024 में स्कोर बेहद औसत (270-360 के बीच) था। एक साल के भीतर ऐसा क्या ‘चमत्कार’ हुआ कि सभी को सरकारी सीटें मिल गईं? सीकर की कोचिंग में दिए गए टेस्ट में भी इन बच्चों का औसत स्कोर नीट की कट-ऑफ से काफी कम था। विकास का औसत टेस्ट स्कोर 384 था, जबकि सानिया का 341-361 के बीच। 12वीं में 55% और 70% अंक लाने वाले छात्र अक्सर नीट जैसी गलाकाट प्रतिस्पर्धा में सरकारी कॉलेज से कोसों दूर रह जाते हैं, लेकिन यहाँ पूरा परिवार सफल रहा।

Expose Now का तीखा सवाल:-

क्या यह सिर्फ कड़ी मेहनत का नतीजा है, या फिर सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर मेधावी छात्रों के हक पर डाका डाला गया है? जमवारामगढ़ के बिवाल परिवार के इन ‘डॉक्टरों’ की डिग्री और दाखिले की प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच होनी अनिवार्य है।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now

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