कोटा में ‘सिस्टम’ का सरेंडर: प्रसूताओं के लिए काल बने सरकारी अस्पताल; 4 की मौत के बाद सीजेरियन बंद

कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल और जेकेलोन अस्पताल में चिकित्सकों की लापरवाही से सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी संक्रमण के कारण अब तक चार प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। वहीं, चार प्रसूताओं की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है, जबकि भर्ती एक प्रसूता की तबीयत में मामूली सुधार हुआ है। किडनी में संक्रमण के कारण मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूता पायल और ज्योति की मौत हो गई थी। जेकेलोन अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद शनिवार देर रात बूंदी जिले के सुवासा निवासी 22 वर्षीय प्रसूता प्रिया महावर और रविवार देर रात डीसीएम श्रीराम नगर निवासी पिंकी महावर (26) की मौत हो गई।

दोपहर डेढ़ बजे डिलीवरी, रात साढ़े 11 बजे मौत

मृतका प्रिया के पति रोहित ने बताया कि उसकी शादी 18 अप्रेल 2025 को हुई थी। 8 मई को प्रिया को प्रसव के लिए जेकेलोन अस्पताल लेकर आए थे, जहां चिकित्सकों ने सिजेरियन डिलीवरी की सलाह दी। 9 मई को करीब 1.30 बजे सिजेरियन डिलीवरी हुई। उसके बाद ड्रिप चढ़ाई गई। शाम 5 बजे बाद अचानक प्रिया की तबीयत खराब होने लगी। रात 8 बजे के आसपास तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर चिकित्सकों ने जनरल वार्ड से वेंटिलेटर पर ले लिया। रोहित ने बताया कि उनसे जो दवा मंगाई गई, वह वे बाहर से लेकर आए, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और रात 11.30 बजे प्रिया की मौत हो गई। 12 बजे बाद डॉक्टर ने प्रिया को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर ने परिजनों को खबर नहीं देकर सीधे पुलिस को सूचना दी। तीन गाड़ी में पुलिस मौके पर पहुंची और कहा कि या तो पोस्टमार्टम कराओ या शव को ले जाओ। रोहित ने बताया कि चिकित्सकों की लापरवाही के कारण प्रिया की मौत हुई है।

अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई

जेकेलोन चिकित्सालय में भर्ती प्रसूता पिंकी महावर की तबीयत रविवार शाम को गंभीर हो गई। पहले ही चिकित्सालय के इमरजेंसी आइसीयू में भर्ती पिंकी वेंटिलेटर पर थी। रविवार शाम तबीयत अधिक बिगड़ने पर चिकित्सकों ने परिजनों को प्रसूता को अपनी जिम्मेदारी पर वेंटिलेटर वाली एम्बुलेंस से मेडिकल कॉलेज ले जाने को कहा। इसके बाद परिजन शाम करीब 5 बजे से वेंटिलेटर एम्बुलेंस का इंतजाम करने में जुटे रहे। परिजन मनीष महावर ने बताया कि उनकी मामी पिंकी (26) को जेकेलोन में भर्ती करवाया था, जहां उन्होंने सिजेरियन डिलीवरी के दौरान शिशु को जन्म दिया, लेकिन उसकी तबीयत बिगड़ गई। चिकित्सकों ने रविवार को आइसीयू में मोबाइल ले जाने पर भी पाबंदी लगा दी और केवल अच्छे उपचार का आश्वासन ही दिया। शाम करीब पांच बजे उन्होंने पिंकी की हालत को गंभीर बताते हुए उसे अपनी जिम्मेदारी पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाने की सलाह दी। देर रात पिंकी की मौत हो गई।

सरकारी अस्पतालों में सीजेरियन ऑपरेशन टाले

प्रसूताओं की मौत के बाद अब सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी के लिए महिलाओं को भर्ती करने से इनकार किया जा रहा है। रामपुरा सेटेलाइट अस्पताल में भी भर्ती करने से हाथ खड़े कर दिए गए। इस कारण डिलीवरी के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना मजबूरी हो गई है।

अस्पताल प्रशासन ने साधी चुप्पी, ओटी रजिस्टर गायब

प्रसूताओं की मौत के मामले में चिकित्सा प्रशासन ने मौन साध लिया है। जिम्मेदार जवाब देने से बच रहे हैं, सिर्फ इतना कह रहे हैं कि ‘ऊपर’ से उन्हें इस मामले में कोई बात नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, ओटी वार्ड का ड्यूटी रजिस्ट्रर भी गायब कर दिया गया है।

अधिकारियों और अधीक्षक का पक्ष

“प्रिया की मौत टैचीकार्डिया (हार्ट बीट ज्यादा होने) से हुई है। उसकी हार्टबीट 200 से अधिक थी। चिकित्सा विभाग की कोई लापरवाही नहीं है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद कुछ कॉम्प्लिकेशंस आ जाते हैं। परिजनों ने प्रिया का पोस्टमार्टम कराने की मना कर दिया। पोस्टमार्टम होता तो मौत का कारण स्पष्ट होता।” — डॉ. निर्मला शर्मा, अधीक्षक, जेके लोन अस्पताल, कोटा

“प्रकरण की प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया चिकित्सा प्रोटोकॉल एवं प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आने पर विभाग ने जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की है। राज्य सरकार ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोषी पाए जाने वाले सभी अधिकारी, चिकित्सक अथवा कार्मिक के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।” — गायत्री राठौड़, प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग

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