राजस्थान में पेपर लीक और नकल माफिया के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। SOG ने वर्ष 2022 में आयोजित प्राध्यापक/स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले का पर्दाफाश करते हुए राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
कैसे खुला पेपर लीक का राज?
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (SOG) विशाल बंसल के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत ओपीजेएस विश्वविद्यालय, चूरू से बैक डेट में फर्जी मार्कशीट तैयार कर अवैध नियुक्तियां पाने की गोपनीय सूचना से हुई थी। जांच के दौरान अशोक कुमार यादव नाम का अभ्यर्थी सामने आया, जिसने मेरिट में तीसरी रैंक हासिल की थी। जब उसके अंकों का विश्लेषण किया गया, तो पाया गया कि उसने प्रथम पेपर (GK) में मात्र 68 अंक लिए थे, लेकिन विषय के पेपर (कृषि विज्ञान) में 300 में से 239 अंक हासिल किए। इस भारी असंतुलन ने शक पैदा किया और पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा गैंग से ₹7 लाख में सॉल्व्ड पेपर खरीदा था।

आरपीएससी सदस्य की संलिप्तता: ₹60 लाख में सौदा
SOG की जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मुख्य पेपर माफिया शेर सिंह मीणा को यह प्रश्न पत्र तत्कालीन RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा ने उपलब्ध कराया था।
- कटारा को कृषि विज्ञान का प्रश्न पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
- उन्होंने प्रश्न पत्र को अवैध रूप से अपने सरकारी निवास पर ले जाकर अपने भांजे विजय डामोर से रजिस्टर में उतरवाया।
- इसके बदले कटारा ने शेर सिंह से ₹60 लाख का भुगतान लिया।
भांजे के लिए दूसरी डील: पेपर के बदले पेपर
जांच में एक और रोचक बात सामने आई कि बाबूलाल कटारा का भांजा विजय डामोर खुद भूगोल विषय से परीक्षा दे रहा था। चूंकि भूगोल का पेपर कटारा के पास नहीं था, इसलिए उन्होंने शेर सिंह मीणा से शर्त रखी कि ₹60 लाख के अलावा उसे भांजे के लिए सामान्य ज्ञान और भूगोल का पेपर भी लाकर देना होगा। शेर सिंह ने पेपर विजय के मोबाइल पर भेजा भी था, लेकिन मोबाइल न देखने के कारण विजय उसका लाभ नहीं उठा पाया।
कठोर कार्रवाई की तैयारी

महानिरीक्षक पुलिस (SOG) अजय लांबा के नेतृत्व में टीम अब इस नेटवर्क की अन्य कड़ियों की जांच कर रही है। बाबूलाल कटारा, विजय डामोर और अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा को गिरफ्तार किया जा चुका है। SOG यह भी पता लगा रही है कि कटारा के कार्यकाल के दौरान और किन-किन परीक्षाओं में अनियमितताएं बरती गईं।
