गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना में नए लक्ष्यों पर रोक, पोर्टल अपडेट के नाम पर ऋण अटका

दौसा। राजस्थान के पशुपालकों के लिए एक निराश करने वाली खबर सामने आ रही है। पशुपालकों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक संबल देने के लिए शुरू की गई ‘गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना’ (Gopal Credit Card Scheme) फिलहाल अधर में लटक गई है। नए लक्ष्य तय नहीं होने और तकनीकी खराबी के चलते प्रदेश भर में इस योजना के तहत ऋण मिलना बंद हो गया है।

सरकार ने न केवल नए आवेदनों पर रोक लगाई है, बल्कि पुराने लाभार्थियों को दोबारा ऋण वितरण (Re-loan) करने पर भी पाबंदी लगा दी है।

बजट में उल्लेख नहीं: पशुपालकों में असमंजस

जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष अप्रैल 2025 में योजना के लक्ष्य निर्धारित किए गए थे, लेकिन इस साल अब तक कोई नए दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं। सहकारी बैंक के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान बजट घोषणाओं में भी इस योजना का कोई विशेष उल्लेख नहीं मिला है, जिससे पशुपालकों के बीच योजना के बंद होने का डर सता रहा है।

ग्रामीण स्वरोजगार को लगा झटका (केस स्टडी)

  1. शंकर लाल (ग्रामीण): शंकर लाल ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन आवेदन तो किया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न तो राशि मिली और न ही बैंक से कोई संतोषजनक जवाब मिला।
  2. पूजा (महिला पशुपालक): स्वरोजगार की इच्छुक पूजा ने बताया कि वह गाय खरीदकर अपना काम शुरू करना चाहती हैं, लेकिन वर्तमान में नए आवेदन तक स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं।

क्या है गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना?

यह राज्य सरकार की एक महत्त्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य पशुपालकों को साहूकारों के चंगुल से छुड़ाना है।

  • ऋण राशि: ₹1 लाख तक का अल्पकालिक ऋण।
  • ब्याज दर: 0% (ब्याज मुक्त ऋण)।
  • अवधि: 365 दिन (एक वर्ष) के लिए।
  • उद्देश्य: पशुओं के लिए चारा, दवाइयां और देखभाल के खर्चों को पूरा करना।

निजी साहूकारों पर निर्भरता बढ़ने का खतरा

गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही पशुओं के लिए चारे और पानी की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में आर्थिक सहायता बंद होने से पशुपालकों को अब ऊंचे ब्याज दरों पर निजी साहूकारों से कर्ज लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। दौसा सहित कई जिलों के पशुपालकों ने सरकार से इस योजना को तुरंत प्रभाव से फिर से शुरू करने की मांग की है।

“पोर्टल को अपडेट किया जा रहा है, इस तकनीकी कारण से फिलहाल नए आवेदन नहीं लिए जा रहे हैं। जिन लोगों ने पहले आवेदन किए हैं, उन्हें नियमों के तहत ऋण प्रक्रिया से जोड़ा गया है।”

रोहित सिंह, एमडी, केन्द्रीय सहकारी बैंक, दौसा

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