भीलवाड़ा में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए जांच एजेंसी ने ₹4,04,000 की रिश्वत लेते हुए एक अधिशाषी अभियंता (XEN) और दो ठेकेदारों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। बुधवार को अदालत में पेशी के बाद तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से संबंधित विभाग में जबरदस्त हड़कंप मचा हुआ है। जांच में सामने आया है कि यह रिश्वत डीएमएफटी (DMFT) फंड के जरिए कराए गए कार्यों के बदले ली जा रही थी। चौंकाने वाली बात यह है कि रिश्वत की यह राशि केवल आरोपियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसे कलेक्ट्रेट के कुछ अन्य स्तरों पर भी वितरित किया जाना था।
इस पूरे प्रकरण में विभाग के सबसे बड़े अधिकारी यानी अधीक्षण अभियंता (SE) की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जानकारी के अनुसार, उक्त SE की नियुक्ति जिले के ही एक विधायक की सिफारिश पर की गई थी। जांच एजेंसी को पता चला है कि SE ने ही अधिशाषी अभियंता को फोन कर रिश्वत की राशि लेकर कार्यालय बुलाया था, लेकिन एजेंसी की सक्रियता की भनक लगते ही वह मौके से गायब हो गया। हाल ही में जिले में आयोजित उप-मुख्यमंत्री के एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान भी विभाग का यह मुख्य अधिकारी नदारद रहा, जिससे उन पर शक और गहरा गया है।
जांच एजेंसी अब फरार अधीक्षण अभियंता की सरगर्मी से तलाश कर रही है और उनकी ‘जन्म कुंडली’ खंगालने में जुटी है। विभाग से आरोपियों की सर्विस बुक और अन्य संबंधित दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भ्रष्टाचार के इस जाल में विधायक और कलेक्ट्रेट के अन्य अधिकारियों की कितनी संलिप्तता है। फिलहाल, इस कार्रवाई ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों के बेनकाब होने की संभावना जताई जा रही है।
