राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में गिरफ्तार किए गए पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। आज सुबह हुई नाटकीय गिरफ्तारी के बाद, एसीबी (ACB) ने उन्हें विशेष न्यायालय में पेश किया, जहाँ कोर्ट ने उन्हें 11 मई तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। अब अगले चार दिनों तक एसीबी की टीम उनसे 900 करोड़ के इस फर्जीवाड़े की कड़ियों को लेकर गहन पूछताछ करेगी।
एसीबी की टीम ने आज सुबह करीब 5:00 बजे जोशी को उनके आवास से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद नियमानुसार जयपुरिया अस्पताल में उनका मेडिकल चेकअप कराया गया। इसके बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच एसीबी कोर्ट लाया गया। कोर्ट में बहस के बाद न्यायाधीश ने एसीबी के तर्कों को स्वीकार करते हुए जांच के लिए 11 मई तक की रिमांड मंजूर की।
“राजनीति से प्रेरित है गिरफ्तारी”
कोर्ट से बाहर निकलते समय महेश जोशी के तेवर तीखे नजर आए। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को पूरी तरह से ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया।
“मैं पूरी तरह निर्दोष हूँ, मैंने अपने कार्यकाल में कोई गलती नहीं की है। यह पूरी कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और राजनीतिक दबाव के कारण मुझे निशाना बनाया जा रहा है। यह सब मेरी समझ से बाहर है, लेकिन मुझे न्यायपालिका पर भरोसा है, सच्चाई जल्द ही सबके सामने आ जाएगी।”
एसीबी की टीम अब रिमांड के दौरान महेश जोशी से उन फाइलों और टेंडरों के बारे में पूछताछ करेगी जिनमें फर्जी सर्टिफिकेट्स के बावजूद करोड़ों का भुगतान किया गया। सूत्रों के अनुसार, विभाग के कुछ अन्य अधिकारियों और बिचौलियों के साथ जोशी के आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा सकती है।
एसीबी को उम्मीद है कि 11 मई तक की इस रिमांड अवधि में ‘भ्रष्टाचार के इस चक्रव्यूह’ के कई और सफेदपोश चेहरों से पर्दा उठ सकेगा। विशेष रूप से संजय अग्रवाल और संजय बड़ाया जैसे नामों को लेकर जोशी से तीखे सवाल किए जाने की संभावना है।