पिंक सिटी की सुरक्षा भगवान भरोसे? राजधानी में आधी डिजिटल निगरानी ठप, बदमाशों को पकड़ने में पुलिस के छूटे पसीने

राजधानी की डिजिटल निगरानी व्यवस्था इन दिनों ‘अंधी और बहरी’ साबित हो रही है। जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में सुरक्षा के लिए लगाए गए 708 सीसीटीवी कैमरों में से 309 कैमरे खराब पड़े हैं। यानी शहर की सुरक्षा करने वाली आधी डिजिटल आंखें तकनीकी खामियों और प्रशासनिक सुस्ती के कारण बंद हैं।

पत्राचार का अंबार, नतीजा सिफर

हैरानी की बात यह है कि इस समस्या को दुरुस्त करने के लिए पुलिस कमिश्नर से लेकर अभय कमांड सेंटर के प्रभारी तक पिछले 2 साल में करीब 65 पत्र लिख चुके हैं, लेकिन व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। इनमें से 35 कैमरे तो साल 2023-24 से ही बंद पड़े हैं। इसके अतिरिक्त स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जेडीए और नगर निगम द्वारा लगाए गए कैमरों में से भी 56 कैमरे काम नहीं कर रहे हैं।

केबल कटी, पेनल्टी वसूली, पर मरम्मत नहीं हुई

जांच में सामने आया है कि सबसे ज्यादा 145 कैमरे ‘सावित्री’ कंपनी के बंद हैं। कंपनी का तर्क है कि टोरेंट कंपनी ने गैस लाइन बिछाते समय कैमरों की फाइबर केबल काट दी थी। इस लापरवाही पर डीओआईटी (DoIT) ने टोरेंट कंपनी पर जुर्माना भी लगाया, लेकिन पेनल्टी की राशि मिलने के बाद भी उस पैसे को केबल सुधारने पर खर्च नहीं किया गया।

अपराध जांच पर पड़ रहा है सीधा असर

कैमरे बंद होने का सबसे बड़ा खामियाजा पुलिस को भुगतना पड़ रहा है। किसी भी वारदात के बाद बदमाशों की पहचान, उनके भागने का रूट, वाहन नंबर और मूवमेंट ट्रैकिंग में भारी परेशानी आ रही है। डिजिटल साक्ष्य के अभाव में जांच में देरी हो रही है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।

4 साल से सिर्फ प्रस्तावों में ‘हाईटेक’ जयपुर

राजधानी की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने आईटीएमएस (ITMS) कैमरे लगाने की घोषणा की थी। पिछले 4 सालों से पुलिस और डीओआईटी के बीच केवल कागजी घोड़े दौड़ रहे हैं। हर बार प्रस्ताव में कैमरों की संख्या और फीचर बदले जाते हैं, लेकिन धरातल पर अब तक एक भी नया कैमरा नहीं लगा है।

अधिकारियों का पक्ष: “कमिश्नरेट क्षेत्र में 309 कैमरे लंबे समय से बंद हैं। इन्हें चालू कराने के लिए हम हर माह पत्र लिख रहे हैं और संबंधित विभागों के साथ बैठकें कर रहे हैं।”

डॉ. राजीव पचार, एडिशनल कमिश्नर

“165 कैमरों के लिए फाइबर लाइन ठीक की जा रही है, जो अगले 10-15 दिनों में शुरू हो जाएंगे। बाकी कैमरों के मेंटेनेंस के लिए वर्कऑर्डर दिए जा रहे हैं।”

मुकेश शर्मा, एडि. डायरेक्टर, अभय कमांड सेंटर

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