-मिट्टी को चट्टान (Hard Rock) बताकर लूटे करोड़ों, माप पुस्तिका (MB) में फर्जीवाड़े का खुला खेल
-मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल और इंजीनियरों की मिलीभगत से 25 करोड़ से ज्यादा का फर्जीवाड़ा, 3 जांचों के बाद भी खामोश विभाग
जयपुर। भ्रष्टाचार के खिलाफ Expose Now की मुहिम के इस दूसरे भाग में हम उजागर कर रहे हैं गढ़ी की रेट कॉन्ट्रैक्ट (RC) निविदा के तहत कुल 55 कार्यादेशों में हुए गंभीर फर्जीवाड़े को। फर्म मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने PHED इंजीनियर्स के साथ मिलकर 25 करोड़ से अधिक का भ्रष्टाचार किया है। इस घोटाले की पुष्टि 3 विभागीय जांचों में भी हो चुकी है, लेकिन मिलीभगत के चलते आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यह है कि अगर मात्र 2 योजनाओं में इतना बड़ा फर्जीवाड़ा है, तो लगभग 100 करोड़ की इस पूरी योजना में न जाने कितने करोड़ की लूट की गई होगी।

स्टोरी-1 में करीब एक दर्जन घोटालों का खुलासा करने के बाद, आज की स्टोरी में हम बता रहे हैं कि कैसे बाकावाडा जल योजना में पाइपलाइन डालने और अर्थवर्क में भारी अनियमितताएं की गईं और हार्ड रॉक (Hard Rock) दिखाकर लाखों का फर्जी भुगतान उठाया गया।
बाकावाडा जल योजना: भौतिक स्थिति और तकनीकी स्वीकृति एक नज़र में:-
-तकनीकी स्वीकृति राशि: 134.93 लाख (दिनांक 06.02.2023)
-जारी की गई राशि: 128.261 लाख (दिनांक 10.05.2023)
-निरीक्षण तिथि: 21.11.2024 को जांच दल द्वारा जल योजना का निरीक्षण
-उपस्थिति: निरीक्षण के दौरान अनुबंधक फर्म और TPIA एजेंसी (M/S WAPCOS) के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
मिट्टी की खुदाई में ‘हार्ड रॉक’ का फर्जीवाड़ा:-
बाकावाडा में मोबाइल टावर के सामने पाइपलाइन की खुदाई में मिट्टी व बजरी (Soil Mix with Boulders) पाई गई है। जबकि, माप पुस्तिका (MB) में ‘सॉफ्ट रॉक’ और ‘हार्ड रॉक ब्लास्टिंग / हार्ड रॉक ब्लास्टिंग प्रोहिबिटेड’ दर्ज करके फर्जी भुगतान उठाया गया है। जलदाय विभाग के इंजीनियर्स ने ठेका फर्म मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल के साथ मिलीभगत कर पाइपलाइन डालने के दौरान अर्थवर्क के कार्य में बजरी व मिट्टी को हार्ड रॉक दिखाकर लाखों रूपए का फर्जी भुगतान उठाकर केन्द्र व राज्य सरकार को बड़ा वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया। इसके अलावा, 100 MM की DI वितरण पाइपलाइन को पुरानी ट्रेंच (Trench) में ही डाल दिया गया, और अर्थवर्क और पाइपों का अलग-अलग भुगतान प्रमाणित कर लाखों का फर्जी भुगतान उठा लिया गया।

ट्यूवेल (Tubewell) निर्माण में गंभीर अनियमितताएं:-
जांच दल द्वारा 22.11.2024 को किए गए नलकूपों के निरीक्षण के दौरान भी गंभीर फर्जीवाड़े सामने आए। जांच टीम द्वारा रेंडमली 2 ट्यूवैलों की जांच की गई, तो जांच में सामने आया कि जिन ट्यूबवैलों की गहराई एमबी में 109 मीटर व 100 मीटर दिखाई हुई थी, उनकी मौके पर जांच की गई तो क्रमशः 67.2 मीटर व 64 मीटर ही पाई गई। निविदा शर्तों के अनुसार MS Casing Pipe की मोटाई BOQ के अनुसार 5.4 mm होनी चाहिए थी, जो मौके पर केवल 3.3 mm एमएम ही पाई गई। इसी प्रकार नलकूपों में 13.5 व 15 मीटर एमएस ब्लैक केसिंग पाइप का भुगतान किया गया है, जबकि मौके पर लंबाई 11 मीटर और 11.70 मीटर ही पाई गई। अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि 2 नलकूपों की जांच में ही इतना फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है तो फिर पूरी योजना के नलकूपों में कितना फर्जीवाड़ा किया गया होगा। इतना ही नहीं मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने इन दोनों नलकूपों के बीच दूरी भी मात्र 10.70 मीटर रखी, जबकि नियमानुसार दो नलकूपों के बीच की दूरी न्यूनतम 30 मीटर होनी चाहिए। इसके साथ ही अनुबंध के अनुसार हाइड्रोलॉजिस्ट रिपोर्ट संलग्न की जानी थी, लेकिन वो भी साथ नहीं लगाई और इंजीनियर्स ने मिलीभगत से फर्म को फर्जी और घटिया कार्यों का पूरा भुगतान कर दिया।
पाइपलाइन की लंबाई और HDPE में हेराफेरी:-
योजना में ठेका फर्म मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने जलदाय विभाग के संबंधित जेईएन, एईएन और एक्सईएन के साथ मिलीभगत कर न केवल अर्थ वर्क कार्य में फर्जीवाड़ा किया, बल्कि डीआई पाइपलाइन की लंबाई में भी बड़ा फर्जीवाड़ा करते हुए लंबाई को बढ़ाकर दिखाते हुए लाखों रूपए का फर्जी भुगतान उठाया गया। योजना में OHSR से मंदिर तक 100 MM की DI वितरण पाइपलाइन की वास्तविक लंबाई केवल 1885 मीटर पाई गई है, जबकि 2480 मीटर का भुगतान किया गया है। इसी प्रकार फर्म ने HDPE पाइपलाइन डालने में भी बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया। 75 एमएम की पाइपलाइन फर्म द्वारा बिना किसी स्वीकृति के ही डाल दी गई। इसके साथ पाइपलाइन डालने के दौरान इसकी लंबाई और गहराई का MB में कोई रिकार्ड ही नहीं है, फिर भी इंजीनियर्स ने BOQ की दरों के अनुसार फर्म को पाइपलाइन का फर्जी भुगतान कर दिया गया। इस फर्जीवाड़े के मामले में जलदाय विभाग अधिकारियों और TPIA द्वारा स्पष्टीकरण न देने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

उच्च जलाशय (OHSR) निर्माण में खामियां:-
रेट कॉन्ट्रैक्ट (RC) निविदा के तहत फर्म मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल द्वारा निर्मित 150 KL का OHSR विभाग की मानक ड्राइंग के अनुरूप नहीं बनाया गया है। ठेका फर्म द्वारा बनाए गए सभी OHSR में मानक ड्राइंग के अनुसार नहीं बनाकर ठेका फर्म द्वारा 10 से 12 क्विंटल तक स्टील कम लगाकर सरकार को सभी OHSR में 4 से 5 करोड़ का फर्जी भुगतान उठाकर वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया। उच्च जलाशय के Bottom Dome पर Puddle Collar नहीं लगाए गए हैं, और कोई Sign Board भी नहीं लगाया गया है।
2 कार्यों में 1.50 करोड़ से ज्यादा का फर्जीवाड़ा, 55 कार्यों में कितना फर्जीवाड़ा ?
Expose Now द्वारा उजागर किए गए इस महाघोटाले में, फर्म मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने पीएचईडी इंजीनियर्स के साथ मिलीभगत करके रेट कॉन्ट्रैक्ट (RC) के तहत 2 कार्यों में ही 1.50 करोड़ से अधिक का फर्जीवाड़ा कर दिया गया। अब सवाल उठता है कि रेट कॉन्ट्रैक्ट (RC) निविदा के तहत किए गए 55 कार्यों में कितना फर्जीवाड़ा किया गया होगा। Expose Now की विशेष पड़ताल के अनुसार इस योजना में मैसर्स ने 25 करोड़ से ज्यादा का फर्जीवाड़ा किया गया है, लेकिन बड़ा सवाल ये उठता है कि फर्म के खिलाफ इतने गंभीर फर्जीवाड़े के प्रकरण में आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, जो कि पूरे जलदाय विभाग पर सवालिया निशान है।
कौन है इस महाघोटाले का असली जिम्मेदार?
जलदाय विभाग (PHED) और फर्म ‘मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल’ के इन कारनामों ने गढ़ी की जनता को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित कर दिया है। महज दो योजनाओं में 1.50 करोड़ से अधिक का फर्जीवाड़ा यह साबित करने के लिए काफी है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। तीन-तीन विभागीय जांचों में पोल खुलने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और फर्म के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न होना, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कहीं न कहीं एक बड़ी मिलीभगत है।
Expose Now पार्ट-2 (स्टोरी-3) में आगे क्या?
अगले अंक में पढ़ें – कैसे इसी फर्म ‘मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल’ ने ईमानदारी का चोला पहनकर उदयपुर संभाग की पीएचईडी की पेयजल योजनाओं को दीमक की तरह चाटकर खोखला कर दिया है।
Expose Now के साथ जुड़े रहिए, क्योंकि हम लाते हैं सच की वो परतें जो पर्दे के पीछे छुपी हैं !
