राजस्थान सरकार आरजीएचएस (RGHS) योजना को अब पूरी तरह इंश्योरेंस मोड पर चलाने की तैयारी कर रही है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को इस संबंध में मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिल चुकी है और विभाग का लक्ष्य इसे मई माह में लागू करने का है।
इंश्योरेंस मॉडल की ओर कदम
- सरकार का यह बदलाव राज्य की ‘मां योजना’ के सफल मॉडल से प्रेरित है।
- स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बीमा कंपनी के जरिए क्लेम और भुगतान प्रक्रिया को अधिक सुचारू बनाया जा सकेगा, जिससे अस्पतालों और लाभार्थियों को राहत मिलेगी।
निजी अस्पतालों के प्रमुख सुझाव
योजना के संभावित इंश्योरेंस ड्राफ्ट से पहले प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विजय कपूर ने कई अहम सुझाव दिए हैं:
- 50 हजार का रिम्बर्समेंट मॉडल: एसोसिएशन की मांग है कि 50 हजार रुपए तक के उपचार को पुनर्भरण (रिम्बर्समेंट) मॉडल के तहत लाया जाए। इससे छोटे और मध्यम स्तर के अस्पतालों को समान अवसर मिलेंगे और मरीजों को राज्यभर में आसानी से इलाज मिल सकेगा।
- स्वतः मान्यता: सुझाव दिया गया है कि राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) से मान्यता प्राप्त सभी चिकित्सकों को स्वतः इस योजना में शामिल किया जाए। वर्तमान में चल रही चयनात्मक एम्पैनलमेंट प्रक्रिया को खत्म कर पारदर्शी प्रणाली लागू करने की मांग की गई है।
- समयबद्ध भुगतान: निजी अस्पतालों ने भुगतान में होने वाली देरी को एक बड़ी समस्या बताया है। उन्होंने समयबद्ध भुगतान व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता जताई है।
- नीति निर्माण में भागीदारी: एसोसिएशन ने जोर दिया है कि नीति निर्माण की प्रक्रिया में निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि निर्णय व्यावहारिक और संतुलित हों।
संशय और समाधान
अस्पतालों का कहना है कि यदि इंश्योरेंस मॉडल लागू किया जाता है, तो यह पूरी तरह पुनर्भरण आधारित होना चाहिए ताकि अनावश्यक तकनीकी जटिलताओं से बचा जा सके। सरकार का दावा है कि इस नए मोड से इलाज की सुविधा निर्बाध होगी और पुरानी समस्याओं का अंत होगा।
संपादकीय नोट: “RGHS का इंश्योरेंस मॉडल में बदलाव राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ा अपडेट है। अब देखना यह होगा कि सरकार निजी अस्पतालों के इन सुझावों को ड्राफ्ट में कितना शामिल करती है।”
