EXPOSE NOW खुलासा (पार्ट-5)- भ्रष्टाचार का बड़ा कारनामा, इंजीनियर्स ने फोटोकॉपी पर किया करोड़ों का भुगतान

-मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल के फर्जीवाड़ों का करोड़ों का खेल

जयपुर/उदयपुर। ‘EXPOSE NOW’ की विशेष खोजी श्रृंखला के पांचवें भाग में हम PHED उदयपुर संभाग के डूंगरपुर जिले के सोम-कमला-अम्बा बांध परियोजना में हुए उस भ्रष्टाचार के खेल को उजागर कर रहे हैं, जहां नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रूपए के जनता के धन की लूट मचाई गई। परियोजना जुलाई 2023 में पूरी होनी थी, लेकिन 27 महिनों की देरी के बाद भी 151 गांवों की योजना से जनता को पूरा लाभ नहीं मिला पाया। संवेदक ने न तो साइट पर इंजीनियर रखे, न बीमा कराया और न ही डिजिटल मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर दिया। इसके बावजूद विभाग ने पेनल्टी लगाने के बजाय संवेदक को हर कदम पर ‘करोड़ों का अदेय लाभ’ पहुंचाया।

फोटोकॉपी पर ‘मेहरबानी’, मूल दस्तावेज गायब:-

सबसे चौंकाने वाला खुलासा बिंदु संख्या 6 में हुआ है। नियमों के मुताबिक भुगतान के लिए मूल बिल (Original Invoices) अनिवार्य हैं, लेकिन यहां संवेदक ने केवल फोटोकॉपी थमाई और विभाग के ‘दरियादिल’ अधिकारियों ने करोड़ों के चेक काट दिए। न ई-वे बिल देखा गया, न यह जांचा गया कि माल वास्तव में साइट पर पहुंचा भी है या नहीं।

पेंसिल से लिखी जा रही थी करोड़ों की ‘इबारत’:-

सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ की पराकाष्ठा देखिए—माप पुस्तिकाओं (MB) में प्रविष्टियां पेंसिल से दर्ज की गईं ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बदला जा सके। 56 माप पुस्तिकाओं में कई पन्ने खाली छोड़ दिए गए और कई जगह कांट-छांट की गई। अधिकारियों ने इन फर्जीवाड़ों पर अपने हस्ताक्षर करना भी जरूरी नहीं समझा।

ऑडिट रिपोर्ट: PHED उदयपुर (परियोजना खंड-द्वितीय) में भारी अनियमितताएं:-

  1. तकनीकी और वित्तीय नियमों का खुला उल्लंघन:

-दूरी में कटौती न कर संवेदक को पहुंचाया लाभ:- पाइप लाइन बिछाने के दौरान प्रयुक्त वाल्व और अन्य स्पेशियल्स की लंबाई को कुल पाइप लाइन की लंबाई से कम नहीं किया गया, जिससे संवेदक को संभावित अधिक भुगतान हुआ।

-फोटोकॉपी बिलों पर करोड़ों का भुगतान:- संविदा शर्तों के विपरीत, मूल बीजकों (Original Invoices) के स्थान पर केवल फोटोकॉपी के आधार पर भुगतान किया गया। इसमें ई-वे बिल और डिलीवरी नोट का भी अभाव पाया गया।

-बिना हस्ताक्षर और तिथि के रिकॉर्ड गायब:- माप पुस्तिकाओं (MB) और स्टॉक रजिस्टरों पर जिम्मेदार अधिकारियों के दिनांकित हस्ताक्षर और पदनाम गायब थे, जो पारदर्शिता के सरकारी निर्देशों का खुला उल्लंघन है।

-संविदा संसाधनों की अनुपलब्धता:- संवेदक ने अनुबंध के अनुसार वाहन, कंप्यूटर, प्रिंटर और डिजिटल निगरानी के लिए “BOCS PMS” सॉफ्टवेयर उपलब्ध नहीं कराया, फिर भी विभाग ने कोई शास्ति (Penalty) नहीं वसूली।

-त्रिपक्षीय अनुबंध का अभाव:- ग्राम जल स्वच्छता समिति (VWSC) के साथ अनिवार्य त्रिपक्षीय अनुबंध निष्पादित नहीं किया गया।

-पेयजल आपूर्ति में 24 माह का विलंब:- परियोजना की समय सीमा जुलाई 2023 में समाप्त होने के 24 माह बाद भी कार्य अपूर्ण है, जिससे 151 गांवों के उपभोक्ता लाभ से वंचित हैं।

  1. प्रक्रियात्मक और प्रशासनिक लापरवाही उजागर:-

बाधा पंजिका (Hindrance Register) का अभाव:- कार्य में देरी के कारणों का दस्तावेजीकरण करने वाली बाधा पंजिका नहीं बनाई गई, जिससे विलंब के लिए जवाबदेही तय करना असंभव हो गया।

निरीक्षण में भारी कमी:- सहायक से लेकर अतिरिक्त मुख्य अभियंता तक किसी भी स्तर पर निर्धारित मानदण्डों के अनुसार कार्यों का प्रभावी निरीक्षण नहीं किया गया।

माप पुस्तिकाओं (MB) में हेराफेरी:- 56 माप पुस्तिकाओं में काट-छांट, खाली पन्ने छोड़ना और पेंसिल से प्रविष्टियां दर्ज करना जैसी गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।

बीमा और श्रमिक सुरक्षा की अनदेखी:- संवेदक ने न तो मैनपावर और मशीनों का बीमा कराया और न ही श्रमिकों के पंजीकरण और बैंक खातों में भुगतान के प्रमाण दिए।

तकनीकी स्टाफ की कमी:- 100 लाख से अधिक की परियोजना होने के बावजूद साइट पर स्नातक इंजीनियर (Technical Staff) की नियुक्ति का कोई साक्ष्य नहीं मिला।

बड़ा सवाल: किसकी शह पर हुआ यह खेल?
जब निरीक्षण के लिए सहायक अभियंता से लेकर अतिरिक्त मुख्य अभियंता तक के कोटे तय हैं, तो आखिर क्यों किसी भी अधिकारी ने इन अनियमितताओं को नहीं पकड़ा? क्या यह केवल लापरवाही है या फिर भ्रष्टाचार का एक संगठित ढांचा?

जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना, जिसका उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पानी पहुँचाना है, उदयपुर के परियोजना खंड-द्वितीय में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। 126.05 करोड़ का व्यय होने के बाद भी कार्य अधूरा रहना और ऑडिट द्वारा उजागर की गई 80.30 करोड़ की अनियमितता राजस्थान सरकार के “जीरो टॉलरेंस” के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

EXPOSE NOW की यह रिपोर्ट संबंधित जांच एजेंसियों (ACB और ED) के लिए एक पुख्ता आधार है ताकि दोषियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।

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