जयपुर | रेलवे की टिकटिंग व्यवस्था में एक बड़ी खामी सामने आई है। शताब्दी, राजधानी और वंदे भारत ट्रेनों में ऑनलाइन बुकिंग के दौरान ‘नो फूड’ विकल्प हटाने या नीचे शिफ्ट करने से यात्री भ्रमित हो रहे हैं, जबकि काउंटर से टिकट लेने पर यह विकल्प साफ तौर पर उपलब्ध है। रेलवे रिजर्वेशन एक्सपर्ट व एसीएम (आर) मदन मीना के अनुसार, करीब 82 फीसदी टिकट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बुक होते हैं, ऐसे में इस बदलाव का सीधा असर अधिकांश यात्रियों पर पड़ रहा है।
कन्फ्यूजन: ऑनलाइन या काउंटर?
जयपुर-नई दिल्ली रूट पर नियमित यात्रा करने वाले यात्री यश चतुर्वेदी बताते हैं कि कई बार वे अपना भोजन साथ ले जाना पसंद करते हैं, लेकिन ऑनलाइन बुकिंग में ‘नो फूड’ विकल्प स्पष्ट न दिखने के कारण उन्हें अनजाने में फूड चार्ज देना पड़ जाता है।
रिजर्वेशन एक्सपर्ट नीरज चतुर्वेदी के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने 1 अगस्त 2017 से राजधानी, शताब्दी और दूरंतो ट्रेनों में ‘नो फूड’ विकल्प शुरू किया था। उस समय वंदे भारत सेवा में नहीं थी। पहले यह विकल्प नाम, उम्र और सीट प्रेफरेंस के बाद ही दिखाई देता था, जहां यात्री वेज, नॉनवेज या नो फूड चुन सकते थे। अब इस स्थान पर वेज, नॉनवेज, जैन मील, वेज डाइबेटिक और नॉनवेज डाइबेटिक विकल्प दिए गए हैं, जबकि ‘नो फूड’ विकल्प को नीचे अपग्रेड और ट्रेवल इंश्योरेंस सेक्शन में शिफ्ट कर दिया गया है। इससे नियमित यात्री भी इसे देख नहीं पाते और भ्रमित हो जाते हैं।
इस बदलाव का असर किराये पर भी पड़ रहा है नियम के अनुसार, यदि यात्री फूड नहीं लेता है तो टिकट में जोड़ी गई केटरिंग राशि घटनी चाहिए, लेकिन ऐसा पूरी तरह नहीं हो रहा। उदाहरण के तौर पर जोधपुर-दिल्ली कैंट वाया जयपुर वंदे भारत ट्रेन में चेयरकार का किराया 1620 रुपए है, जिसमें 364 रुपए केटरिंग के हैं। इसे हटाने पर किराया 1250 होना चाहिए, लेकिन 1265 रुपए वसूले जा रहे हैं। इसी तरह एग्जीक्यूटिव क्लास में भी प्रति यात्री अतिरिक्त 19 रुपए लिए जा रहे हैं।
काउंटर पर सुविधा बरकरार
दूसरी ओर, रिजर्वेशन काउंटर पर एक ही पीएनआर में 2 से 6 यात्रियों के लिए अलग-अलग फूड विकल्प- वेज, नॉनवेज, जैन या नो फूड चुनने की सुविधा स्पष्ट रूप से दी जा रही है। रेलवे ने डायबिटीज मरीजों के लिए विशेष भोजन विकल्प जोड़कर सुविधा बढ़ाई है, लेकिन ‘नो फूड’ विकल्प के स्थान परिवर्तन से बड़ी संख्या में यात्री गफलत में आकर अनचाहे भोजन और अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करने को मजबूर हो रहे हैं।
