-PHED ठेकेदारों ने करोड़ों के काम करने, 3 साली मुफ्त सेवा के बाद भुगतान को लेकर अब अनिश्चितकालीन आंदोलन
जयपुर। राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) के दावों के बीच एक ऐसी कड़वी सच्चाई सामने आई है, जो आने वाले दिनों में प्रदेश की जनता के लिए ‘जल संकट’ का अलार्म बजा सकती है। पिछले 3 सालों से अपनी जेब से पैसा लगाकर जनता को पानी पिला रहे ठेकेदारों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। 25 अप्रैल 2026 से राजस्थान में पेयजल सप्लाई पूरी तरह ठप्प हो सकती है। अपनी जायज मांगों को लेकर दर-दर भटक रहे PHED कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन ने आर-पार की जंग का ऐलान करते हुए 25 अप्रैल से ‘अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार’ कर पेयजल सप्लाई बंद करने का नोटिस थमा दिया है।
चरणबद्ध आंदोलन: कब क्या होगा?
ठेकेदार संघर्ष समिति के अनुसार राज्य सरकार और जलदाय विभाग की ओर से ठेकेदारों की मांगों को लेकर कोई सकारात्मक पहल नहीं किए जाने से प्रदेशभर के पीएचईडी ठेकेदारों में भारी आक्रोश है। ऐसे में अब ठेकेदारों के आह्वान पर संघर्ष समिति ने निर्णय लिया है कि ठेकेदारों द्वारा पेयजल कार्यों का बहिष्कार करने के साथ ही 22 अप्रेल को प्रदेशभर में 2 घंटे पेयजल सप्लाई बंद रखी जाएगी। इसके बाद भी सरकार ने मांगी नहीं मानी तो 23 अप्रेल को 3 घंटे और 24 अप्रेल को 4 घंटे पेयजल की सप्लाई बंद रखी जाएगी। 25 अप्रेल से जलदाय विभाग के सभी ठेकेदारों द्वारा राजस्थान में पूरी तरह से कार्यों का बहिष्कार करते हुए पेयजल सप्लाई को पूर्ण रूप से बंद कर दिया जाएगा।

क्यों सुलग रही है गुस्से की आग?
प्रदेश भर के PHED ठेकेदारों की पाँच ऐसी माँगें हैं जिन पर विभाग कुम्भकर्णी नींद सोया हुआ है:-
-फाइनल बिल: काम पूरे होने के बावजूद सालों से पेमेंट अटका है।
-डेविएशन (Deviation): अतिरिक्त कार्यों (Extra Work) की स्वीकृति नहीं मिल रही।
-Completion Certificate: काम पूरा होने का प्रमाण पत्र लटकाया गया है।
-O&M से मुक्ति: जब अनुबंध खत्म हो गया, तो ठेकेदारों पर जबरन रख-रखाव क्यों थोपा जा रहा है?
-जमानत राशि: वर्षों से जमा Security/Guarantee राशि वापस नहीं की जा रही।
“हमने सेवा की, विभाग ने शोषण किया”
एसोसिएशन के सदस्यों का दर्द छलक उठा है। ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने JJM के तहत काम तो समय पर पूरे किए, लेकिन पिछले 2-3 वर्षों से वे बिना किसी भुगतान के Operation & Maintenance (O&M) का खर्च खुद उठा रहे हैं।
“हमने जनता को प्यासा नहीं रहने दिया, लेकिन क्या विभाग को हमारी और हमारे परिवारों की चिंता नहीं है? बिना फाइनल बिल, बिना सिक्योरिटी रिफंड और बिना किसी औपचारिक भुगतान के हम कब तक अपने घर से डीजल और लेबर का पैसा भरते रहेंगे? लेकिन “अब और नहीं!”
— पीड़ित ठेकेदार
