-सरकारी रिकॉर्ड में नाम, जन्म तिथि और पिता के नाम बदलने का सनसनीखेज खेल
जयपुर। शिक्षा विभाग के गलियारों में इन दिनों एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने विभाग की पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक सजग नागरिक द्वारा SOG जयपुर और उच्चाधिकारियों को सौंपी गई विस्तृत शिकायत में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) जैसलमेर के प्रधानाचार्य पर अपनी पहचान छिपाने, छद्म नामों का उपयोग करने और विभाग को गुमराह कर वित्तीय लाभ लेने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस शिकायत में दस्तावेजी प्रमाणों के साथ दावा किया गया है कि एक ही अधिकारी अलग-अलग सरकारी रिकॉर्ड में भिन्न-भिन्न नामों, जन्म तिथियों और हस्ताक्षरों का उपयोग कर रहा है। EXPOSE NOW पर इस पूरे फर्जीवाड़े के खेल की बिन्दुवार रिपोर्टः-

‘रामकुमार’ की जालसाजी का कच्चा चिट्ठा:-
- दो जन्म तिथियां और अलग-अलग हस्ताक्षर का खेल
शिकायत के अनुसार, राजकाज पोर्टल पर सत्र 2016 और 2017 के दौरान ब्लॉक शिक्षा अधिकारी अरथूना के पद पर कार्यरत व्यक्ति के विवरण में भारी विसंगति है । 2016 के रिकॉर्ड में जन्म तिथि 05.12.1958 दर्ज है, जबकि 2017 में इसी पद पर विवरण में जन्म तिथि 01.10.1966 दिखाई गई है । चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों ही रिकॉर्ड में आवासीय पता और संपत्ति का विवरण एक समान है, लेकिन हस्ताक्षर और जन्म तिथियां अलग हैं। - निविदाओं में ‘राम सिंह’ बनकर पंजीकरण
SPPP पोर्टल पर वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए निविदाएं ‘राम सिंह’ के नाम से प्रकाशित की गई हैं । शिकायतकर्ता का तर्क है कि पोर्टल पर पंजीकरण विभागाध्यक्ष द्वारा सत्यापन और मोबाइल ओटीपी के बाद ही संभव है, जो जानबूझकर पहचान बदलने की ओर इशारा करता है। - न्यायालय और वरिष्ठता सूची में नामों का ‘कॉकटेल’
माननीय उच्च न्यायालय में याचिका RAMKUMAR SINGH के नाम से लगाई गई , जबकि शिक्षा विभाग की वरिष्ठता सूचियों में कभी RAM KUMAR तो कभी RAM KUMAR SINGH नाम का प्रयोग किया गया। वहीं, संस्थान के पत्रों और ई-पत्रिकाओं में स्वयं को आर.के. सिंह के रूप में प्रस्तुत किया गया है। - मतदाता सूची में दो अलग-अलग जिलों में मौजूदगी
वर्ष 2002 की मतदाता सूची के अनुसार, यह व्यक्ति भरतपुर (रूपवास) और अलवर (लक्ष्मणगढ़) दोनों जिलों की मतदाता सूची में ‘रामकुमार’ नाम से पंजीकृत पाया गया। दोनों जगह पत्नी का नाम ‘अजय कुमारी’ ही दर्ज है। - पिता के नामों में भी भारी भिन्नता
राजकीय रिकॉर्ड, राशन कार्ड और राजस्व रिकॉर्ड (अपना खाता पोर्टल) में पिता का नाम कहीं सुमेरा, कहीं सूम्मेरा, तो कहीं सुमेर सिंह और सुम्मेर सिंह अंकित है। यह भ्रमित करने वाली जानकारी भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। - सेवानिवृत्ति से ठीक पहले नाम में संशोधन का दांव
शिकायत में आरोप है कि नियुक्ति आदेश में नाम ‘राम कुमार’ था, जिसे सेवा पुस्तिका में ‘RAM KUMAR singh’ कर दिया गया । अब सेवानिवृत्ति (30 सितंबर 2026) के करीब आते ही, पेंशन लाभ में कोई बाधा न आए, इसलिए मतदाता सूची में पुनः नाम बदलकर ‘राम कुमार’ करवा लिया गया है। - जांच को लंबित रखने और संरक्षण देने के आरोप
आरोप है कि अक्टूबर 2025 से शिकायत लंबित होने के बावजूद जांच दल और उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से इसे दबाया जा रहा है। जानबूझकर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा रही ताकि आरोपी अधिकारी सुरक्षित सेवानिवृत्त हो सके।
प्रशासनिक मौन पर सवाल?
हैरानी की बात यह है कि दस्तावेजों का इतना बड़ा पुलिंदा और पहचान से जुड़े इतने गंभीर आरोप सामने आने के बाद भी शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी इस पर कुंडली मारकर बैठे हैं। आखिर क्या वजह है कि अक्टूबर 2025 से लंबित इस जांच में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई? क्या विभाग किसी ‘चमत्कारी’ सेवानिवृत्ति का इंतज़ार कर रहा है ताकि आरोपी अधिकारी को सभी राजकीय लाभों के साथ सुरक्षित विदाई दी जा सके?
SOG की रडार पर ‘बहुरूपी’ खेल
अब सबकी निगाहें स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) पर टिकी हैं। क्या राजस्थान की यह प्रीमियर जांच एजेंसी इन दस्तावेजों की गहराई से जांच करेगी? क्या एक ही व्यक्ति द्वारा दो जन्म तिथियों और अलग-अलग हस्ताक्षरों के उपयोग के पीछे के असली मकसद का खुलासा होगा?

Expose Now की टीम इस मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है। क्या SOG इन दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर ‘प्रिंसिपल साहब’ के इस छद्म जाल का पर्दाफाश करेगी?
