राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुहीम को जारी रखते हुए भिवाड़ी (अलवर) में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एसीबी की टीम ने उप-पंजीयक (Sub-Registrar) कार्यालय, भिवाड़ी में कार्यरत कनिष्ठ सहायक (Junior Assistant) दीपक कुमार और एक निजी व्यक्ति (दलाल) अभिषेक को 12,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
पूरा मामला: क्या थी रिश्वत की मांग?
प्रकरण के अनुसार, परिवादी ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसने अपनी कंपनी के नाम से एक डीड (दस्तावेज) का पंजीकरण करवाया था।
- काम के बदले कमीशन: डीड रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरा करने और दस्तावेज सौंपने की एवज में कनिष्ठ सहायक दीपक कुमार ने रिश्वत की मांग की।
- दलाल के जरिए वसूली: दीपक कुमार ने परिवादी को डराया कि बिना पैसे के काम नहीं होगा और उसे रिश्वत की राशि अपने सहयोगी (बिचौलिये) अभिषेक को देने का निर्देश दिया।
एसीबी का जाल और रंगे हाथों गिरफ्तारी
एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर 15 अप्रैल 2026 को शिकायत का सत्यापन किया गया, जिसमें रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई।
- ट्रैप की कार्रवाई: सत्यापन के तुरंत बाद जाल बिछाया गया। जैसे ही परिवादी ने रिश्वत की राशि बिचौलिये अभिषेक को सौंपी, पहले से तैयार एसीबी टीम ने दबिश देकर दोनों आरोपियों को दबोच लिया।
- साक्ष्य संकलन: आरोपियों के पास से रिश्वत की राशि बरामद कर ली गई है और उनके हाथों के रासायनिक धोवन (Chemical Wash) से रिश्वत लेने के वैज्ञानिक साक्ष्य भी जुटाए गए हैं।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
एसीबी ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 7A और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। मामले की जांच अब उच्चाधिकारियों द्वारा की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस वसूली में कार्यालय के अन्य अधिकारी भी शामिल थे या नहीं।
वर्तमान स्थिति: एसीबी के पुलिस अधीक्षक (SP) पीयूष दीक्षित के निर्देशन में आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
