बूंदी में घूसखोर पटवारी के खिलाफ मामला दर्ज; जमीन के आपसी बँटवारे के बदले मांगे थे 10 हजार रुपये

राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को जारी रखते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ब्यूरो की स्पेशल यूनिट, कोटा की रिपोर्ट पर जयपुर स्थित सीपीएस थाने में पटवार हल्का दौलतपुरा (इंद्रगढ़, बूंदी) के पटवारी रामकिशन मीणा के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।

पूरा मामला: क्या थी पटवारी की मांग?

प्रकरण के अनुसार, सुमेरगंज मंडी निवासी परिवादी लक्ष्मीचन्द मीणा ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी और उनके भाइयों की ग्राम हरदेवगंज स्थित खातेदारी भूमि का आपसी बँटवारा तहसीलदार इंद्रगढ़ द्वारा 19 जनवरी 2026 को स्वीकृत किया जा चुका था। जब परिवादी इस बँटवारे को राजस्व रिकॉर्ड में ऑनलाइन चढ़वाने के लिए पटवारी रामकिशन मीणा से मिला, तो आरोपी ने इसके बदले 10,000 रुपये की रिश्वत की मांग की। पटवारी ने परिवादी पर दबाव बनाते हुए कहा कि “जब तक पैसे नहीं दोगे, काम नहीं होगा, क्योंकि यह मेरी ही आईडी से ऑनलाइन होना है।”

एसीबी का सत्यापन और जांच

परिवादी की शिकायत पर एसीबी कोटा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकुल शर्मा के निर्देशन में सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई:

  • प्रथम सत्यापन (23 जनवरी 2026): डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर के जरिए की गई गोपनीय जांच में रिश्वत की मांग की पुष्टि हुई। सत्यापन के दौरान सामने आया कि आरोपी पटवारी 5,000 रुपये पहले ही ले चुका था और शेष 5,000 रुपये की और मांग कर रहा था।
  • ट्रैप की कोशिश: एसीबी की टीम ने 29 और 30 जनवरी 2026 को आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बिछाया, लेकिन पटवारी कभी फील्ड वर्क तो कभी अपनी पत्नी की बीमारी का बहाना बनाकर जयपुर निकल गया, जिससे वह पकड़ में नहीं आ सका।

लंबी छुट्टी पर गया आरोपी, अब दर्ज हुई एफआईआर

बाद में सूचना मिली कि आरोपी पटवारी लंबे अवकाश पर चला गया है और उसने अपने प्रभार का कार्य दूसरे पटवारी को सौंप दिया है। आरोपी की अनुपस्थिति के बावजूद, एसीबी के पास रिश्वत की मांग के पर्याप्त तकनीकी और डिजिटल साक्ष्य मौजूद थे। इसी आधार पर पुलिस निरीक्षक अनिता वर्मा की रिपोर्ट पर आरोपी रामकिशन मीणा के खिलाफ नियमित मामला दर्ज कर लिया गया है।

वर्तमान स्थिति: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित ने मामले के अनुसंधान की जिम्मेदारी एसीबी बूंदी के पुलिस उपाधीक्षक हरीश भारती को सौंपी है।

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