राजस्थान: पंचायत और निकाय चुनाव टलने पर भड़के अशोक गहलोत, राष्ट्रपति और राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने प्रदेश में पंचायत और स्थानीय निकायों के चुनाव समय पर नहीं कराने को लेकर वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए इस मुद्दे पर देश की राष्ट्रपति और राज्य के राज्यपाल से हस्तक्षेप करने की गुजारिश की है।

49 सिविल लाइंस पर मीडिया से बातचीत का हवाला देते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान में पंचायत चुनाव और नगर निकाय चुनाव न करवाकर वर्तमान सरकार बाबा साहेब अम्बेडकर के संविधान की धज्जियां उड़ा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग आज सत्ता में हैं, उनका संविधान में विश्वास ही नहीं है।

गहलोत ने कहा, “आज जो कुछ देश में हालात बन गए हैं, ज्यूडिशियरी में भी, एजेंसियों में भी, पूरे देश में बहुत बड़ी स्थिति अजीब बन गई है। फिर भी 14 अप्रैल को अम्बेडकर साहब की जयंती सब मनाते हैं, मनाएंगे भी। उनकी कथनी और करनी में अंतर है।”

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राहुल गांधी लगातार ‘संविधान बचाओ’ की बात इसलिए कह रहे हैं क्योंकि देश में लोकतंत्र कमज़ोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायत और नगर निकाय के चुनाव संविधान का हिस्सा हैं। अगर सरकार को संविधान में विश्वास होता तो ये चुनाव समय पर होते। उन्होंने यह भी जोड़ा कि को-ऑपरेटिव के चुनाव भी करीब 10 साल से नहीं हो रहे हैं।

‘संविधान का ब्रेकडाउन’

मामले की गंभीरता बताते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट कह चुके हैं कि चुनाव करवाने पड़ेंगे और कोर्ट ने अप्रैल तक की डेट भी दे दी थी, तब भी चुनाव नहीं करवाए गए। उन्होंने सवाल किया, “तो आप सोच सकते हो कि ये तो संविधान के विरोध में एक प्रकार से कहना चाहिए कि जिस प्रकार का उन्होंने फैसला किया है, ये तो संविधान का ही ब्रेकडाउन टाइप है।”

अंत में, उन्होंने सरकार की नैतिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रपति और गवर्नर को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए था। उन्होंने पूछा, “चुनाव टाइम पर होने चाहिए थे वरना इस सरकार को नैतिक क्या अधिकार है सत्ता में रहने का? बस खाली जयंती मनाएंगे, उनके वसूलों पर नहीं चलेंगे।”

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