राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) के तहत गरीबों तक पहुंचने वाले गेहूं पर जयपुर में एक संगठित नेटवर्क का नियंत्रण सामने आया है। एक ताजा पड़ताल में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि शहर के राशन वितरण की 118 दुकानों का संचालन महज 28 मोबाइल नंबरों के जरिए किया जा रहा है। इस व्यवस्था ने पूरी पारदर्शिता को ताक पर रख दिया है।
ओटीपी सिस्टम बना धांधली का हथियार
चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही मोबाइल नंबर 13 पोस (POS) मशीनों से जुड़ा मिला है। यह खेल भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदाम से गेहूं उठाने से लेकर राशन दुकानों तक पहुंचने के बीच ‘ओटीपी सिस्टम’ के जरिए संचालित हो रहा है। नियमतः प्रत्येक दुकान का अपना स्वतंत्र संपर्क होना चाहिए, लेकिन यहाँ ओटीपी जिस मोबाइल पर आता है, वही व्यक्ति कई दुकानों की सप्लाई और स्टॉक एंट्री को अपनी उंगलियों पर नियंत्रित कर रहा है।
डेटा से खुला खेल: ये ‘सुपर नंबर’ चला रहे नेटवर्क जांच में सामने आए डेटा के अनुसार, कुछ विशेष नंबरों का जाल कई वार्डों और क्षेत्रों में फैला हुआ है:
- मोबाइल नंबर 9314968787 पर 13 दुकानें लिंक हैं।
- मोबाइल नंबर 9314517822 पर 9 दुकानें संचालित हैं।
इन नंबरों से जुड़े नेटवर्क में निम्नलिखित नाम और संस्थान सामने आए हैं:
- रफीक खान (वार्ड 52)
- गोकुल खान (वार्ड 54)
- विनोद कुमार गुप्ता (वार्ड 54)
- कुंदन कुमार (वार्ड 53)
- तोपखाना हजूरी सहकारी भंडार (वार्ड 53)
- हसीमुद्दीन (वार्ड 53)
- मुक्ति लाल (वार्ड 54)
- युगल किशोर (वार्ड 52)
- आशा पंवार (सांगानेर, वार्ड 47)
इसके अलावा, 3-3 दुकानों को नियंत्रित करने वाले अन्य मोबाइल नंबर भी चिन्हित किए गए हैं: 9829157963, 9829909226, 9829197475, 9414689687, 7414802222, 9875152400, 8949312355, 8005972600, 9829457124, 9929334863|
अजीबो-गरीब जवाब: पड़ोसियों के पास मोबाइल नहीं! जब इन मोबाइल नंबरों के स्वामियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने हास्यास्पद तर्क दिए:
- अशोक अग्रवाल (13 दुकानों से जुड़ा नंबर): उन्होंने बताया कि “3 दुकानें परिजनों के नाम हैं, जबकि बाकी पड़ोसियों की दुकानों पर मोबाइल नहीं होने के कारण मेरा नंबर जोड़ा गया है।”
- तनिष्क अग्रवाल (8 दुकानों से जुड़ा नंबर): उन्होंने दावा किया कि “वे दुकानें छोड़ चुके हैं, लेकिन मोबाइल नंबर अब भी क्यों जुड़ा हुआ है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।”
अधिकारियों का पक्ष इस गंभीर मामले पर प्रियव्रत सिंह चरण (DSO प्रथम)
का कहना है कि कुछ समय पहले उन्हें इस संबंध में शिकायतें मिली थीं, जिन पर कार्रवाई करते हुए कुछ मोबाइल नंबर हटा दिए गए हैं। फिलहाल पूरे मामले की गहराई से जांच कराई जा रही है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर नियमों को दरकिनार कैसे किया गया।
