राजस्थान: वंचित वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षा की राह आसान, बिना दस्तावेजों के भी मिलेगा सरकारी स्कूलों में प्रवेश

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब वंचित और जरूरतमंद श्रेणियों के बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए दस्तावेजी बाधाएं आड़े नहीं आएंगी। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘प्रवेशोत्सव’ कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया है।

निदेशक (प्रारंभिक शिक्षा) सीताराम जाट (IAS) द्वारा जारी इस आदेश के अनुसार, राज्य के सरकारी स्कूलों में घुमंतु, अर्द्धघुमंतु, विमुक्त जातियों, भिक्षावृत्ति में लिप्त परिवारों के बच्चों, प्रवासी श्रमिकों के बच्चों, बालश्रम से मुक्त कराए गए बच्चों और अनाथ बच्चों के नामांकन पर विशेष जोर दिया गया है।

दस्तावेजों के अभाव में नहीं रुकेगा दाखिला

अक्सर देखा जाता है कि घुमंतु या प्रवासी परिवारों के पास पहचान के पुख्ता दस्तावेज नहीं होते, जिसके कारण उनके बच्चों का दाखिला स्कूलों में नहीं हो पाता। इस समस्या को देखते हुए शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:

  • किसी भी बच्चे को दस्तावेजों के अभाव में प्रवेश से वंचित नहीं रखा जाएगा।
  • यदि बच्चे के पास कोई पहचान पत्र या प्रमाण पत्र नहीं है, तो अभिभावक के किसी भी मान्य पहचान पत्र के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा।
  • यदि अभिभावक के पास भी दस्तावेज नहीं हैं, तो उनके द्वारा दी गई सूचना या शपथ पत्र (Affidavit) को आधार मानकर तुरंत प्रवेश सुनिश्चित किया जाएगा।

ग्राम पंचायतों और नगर निकायों की होगी जिम्मेदारी

आदेश में कहा गया है कि एक बार बच्चे का प्रवेश होने के बाद, विद्यालय प्रशासन और संस्था प्रधान संबंधित ग्राम पंचायत या नगर निकाय को सूचित करेंगे। इसके बाद स्थानीय निकायों के सहयोग से बच्चे के आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति करवाई जाएगी, ताकि उसकी शिक्षा निरंतर बनी रहे।

आयु के अनुसार होगा कक्षा का निर्धारण

प्रवेशोत्सव अभियान के दौरान चिह्नित किए गए इन बच्चों को उनकी आयु के अनुरूप उचित आंगनबाड़ी केंद्र या विद्यालय की कक्षा में प्रवेश दिलाकर उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जाएगा। विभाग ने समस्त संयुक्त निदेशकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को इस आदेश की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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