कैंसर के खात्मे के लिए रूस ने तैयार किया ‘ब्रह्मास्त्र’, 60 साल के मरीज को मिली पहली डोज; 2026 तक उपलब्ध होने की उम्मीद

दुनिया भर में जानलेवा बीमारी बन चुके कैंसर के इलाज की दिशा में रूस से एक बड़ी और उम्मीद जगाने वाली खबर आई है। रूसी समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में विकसित पहली ‘पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन’ (Personalized Cancer Vaccine) का पहला डोज एक मरीज को सफलतापूर्वक दे दिया है।

किसे दी गई पहली डोज?

यह वैक्सीन रूस के ही एक 60 वर्षीय मरीज को दी गई है। हालांकि, सुरक्षा और गोपनीयता के चलते मरीज की पहचान गुप्त रखी गई है। यह टीकाकरण एक शुरुआती क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले 3 महीनों में इस ट्रायल के शुरुआती नतीजे सामने आ जाएंगे, जिससे कैंसर के इलाज की भविष्य की दिशा तय होगी।

क्या है ‘पर्सनलाइज्ड’ वैक्सीन? एक्सपर्ट की राय

कैंसर सर्जन डॉ. जयेश शर्मा ने इस तकनीक के बारे में विस्तार से बताया है। उनके अनुसार:

  • कस्टमाइज्ड इलाज: आमतौर पर कीमोथेरेपी जैसे इलाज सभी मरीजों के लिए एक जैसे (One-size-fits-all) होते हैं, लेकिन यह वैक्सीन हर मरीज के लिए अलग से डिजाइन की जाती है।
  • जेनेटिक मैपिंग: सबसे पहले मरीज के ट्यूमर की विशिष्ट विशेषताओं और उसके जेनेटिक म्यूटेशन (DNA में बदलाव) का अध्ययन किया जाता है।
  • इम्यून ट्रेनिंग: इसके बाद वैक्सीन को इस तरह तैयार किया जाता है कि वह मरीज की अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) को केवल कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन्हें नष्ट करने के लिए प्रशिक्षित करे। इससे स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचता।

mRNA तकनीक: कोविड वैक्सीन वाला फॉर्मूला

इस कैंसर वैक्सीन को आधुनिक mRNA (मैसेंजर आरएनए) तकनीक पर आधारित बनाया गया है। यह वही क्रांतिकारी तकनीक है, जिसका उपयोग दुनिया की सफलतम कोविड-19 वैक्सीन बनाने में किया गया था। यह शरीर के भीतर जाकर एंटीबॉडीज को सक्रिय करती है ताकि वे विशिष्ट कैंसर सेल्स पर हमला कर सकें।

कब तक मिलेगी यह वैक्सीन?

कैंसर से जूझ रहे लाखों मरीजों के लिए राहत की बात यह है कि रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसे जल्द से जल्द आम जनता के लिए उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। सरकार की योजना है कि साल 2026 के अंत तक इस वैक्सीन को रूस की अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा प्रणाली (Mandatory Health Insurance) में शामिल कर लिया जाए, जिससे यह आम लोगों की पहुंच में हो सके।

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