राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में गार्नेट खनन कारोबारियों से अवैध वसूली करने वाली एक गैंग के खुलासे के बाद अब पुलिस महकमे के उच्चाधिकारियों पर गाज गिरना शुरू हो गई है। भीलवाड़ा में सीओ सदर के पद पर तैनात प्रोबेशनर IPS माधव उपाध्याय को सोमवार को तत्काल प्रभाव से एपीओ (APO) कर दिया गया है। यह कार्रवाई भीलवाड़ा पुलिस द्वारा रविवार को पकड़ी गई उस वसूली गैंग के संदर्भ में की गई है, जिसमें जहाजपुर विधायक गोपी मीणा के प्रतिनिधि अजय पांचाल को मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि यह गैंग खनन क्षेत्र में सक्रिय कारोबारियों से हर महीने मोटी रकम वसूल रही थी और इस खेल में IPS माधव उपाध्याय की भूमिका भी शक के दायरे में है।

वॉट्सऐप चैट और ‘हिसाब’ के पन्नों ने खोली पोल
इस पूरे मामले में डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने विजिलेंस जांच के कड़े आदेश दिए हैं, जिसकी जिम्मेदारी अजमेर जीआरपी एसपी नरेंद्र सिंह को सौंपी गई है। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार मुख्य आरोपी अजय पांचाल के मोबाइल की जब तकनीकी जांच की गई, तो उसमें IPS माधव उपाध्याय के साथ हुई वॉट्सऐप चैट और कुछ संदिग्ध इनपुट सामने आए। बताया जा रहा है कि अजय और IPS के बीच ‘हिसाब’ को लेकर भी कुछ बातें हुई थीं। जांच के घेरे में यह तथ्य भी है कि अजय पांचाल अधिकारियों को सूचना (इनपुट) देता था और IPS उन्हीं इनपुट के आधार पर कार्रवाई करते थे। फिलहाल इस बात की गहराई से जांच की जा रही है कि क्या इन कार्यवाहियों की आड़ में पैसा वसूली का खेल चल रहा था।
IPS की सफाई और एसपी का बयान
इधर, मामले में अपना नाम आने पर आईपीएस माधव उपाध्याय ने अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने कहा कि उनका इस मामले में कोई रोल नहीं है और चैट से जुड़ी बातें गलत हैं। उन्होंने बताया कि उनकी अजय पांचाल से मुलाकात एसपी ऑफिस में एक केस के सिलसिले में हुई थी और अजय ने पुलिस के साथ कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की थीं। वहीं, भीलवाड़ा एसपी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि अजय पांचाल कुछ समय पहले जहाजपुर विधायक गोपी मीणा के साथ जन समस्याओं को लेकर एसपी ऑफिस आया था, उस समय प्रोबेशनर आईपीएस माधव उपाध्याय भी कमरे में ही मौजूद थे। एसपी ने स्पष्ट किया कि अपराधियों के साथ जिन भी पुलिसकर्मियों के वीडियो या नाम सामने आए हैं, उन सभी के खिलाफ शिकायतों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है।
क्या यह सिर्फ प्रशासनिक चूक है?
भीलवाड़ा पुलिस ने इस गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर बड़े खुलासे का दावा किया था, लेकिन एक प्रोबेशनर आईपीएस का नाम इस तरह के विवाद में आना राजस्थान पुलिस की छवि पर सवाल खड़े करता है। विजिलेंस जांच में अब उन सभी इनपुट और वॉट्सऐप चैट के डेटा को खंगाला जाएगा जिसे अजय पांचाल और आईपीएस के बीच का ‘कनेक्शन’ बताया जा रहा है। यदि जांच में वसूली के साक्ष्य सही पाए जाते हैं, तो यह प्रोबेशनर आईपीएस के करियर के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। फिलहाल, भीलवाड़ा में उन सभी पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है जिनके वीडियो अपराधियों के साथ सामने आए हैं।
