75 का टेस्टर 525 रू में खरीदा, कागजों में काट दिए 1.10 लाख पेड़
5 बड़े अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ खेल
डिस्कॉम की ‘काली कमाई’: ऑडिट रिपोर्ट ने खोली भ्रष्टाचार की पोल! जोधपुर डिस्कॉम का ‘महा-घोटाला’
विशेष रिपोर्ट
भ्रष्टाचार की दीमक जब सरकारी महकमों को चाटने लगती है, तो जनता की खून-पसीने की कमाई किस तरह ‘पावर हाउस’ के सफेदपोश लुटेरों की जेब में जाती है, इसका सबसे बड़ा सबूत बाड़मेर से सामने आया है। जोधपुर डिस्कॉम के बाड़मेर सर्किल में 2021 से 2024 के बीच हुआ 9.50 करोड़ का घोटाला अब फाइलों की कैद से बाहर निकल चुका है।
यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि बेशर्मी की पराकाष्ठा है—जहाँ अधिकारियों ने मिलकर ₹75 के टेस्टर को ₹525 में खरीदा और ₹2500 की ड्रिल मशीन के ₹8000 डकार लिए।
20 महीने तक दबाकर रखी गई ‘ऑडिट रिपोर्ट’
हैरानी की बात यह है कि इस महा-लूट का खुलासा 22 जुलाई 2024 को आई ऑडिट रिपोर्ट में ही हो गया था, लेकिन डिस्कॉम के आकाओं ने 20 महीनों तक इस रिपोर्ट को दबाए रखा। अब जब पुरानी फर्मों के नए बिल पास कराने का दबाव बढ़ा, तब जाकर भ्रष्टाचार की यह सड़ांध बाहर निकली है।
घोटाले के ‘मास्टरमाइंड’ और उनकी काली कमाई
EXPOSE NOW की रिपोर्ट के मुताबिक, इस खेल के असली सूत्रधार वे रसूखदार अधिकारी हैं जिन्होंने चहेती फर्मों को रेवड़ियों की तरह टेंडर बांटे। इसमें 5 बड़े नाम सामने आए हैं:
अजय माथुर (तत्कालीन SE): 178 कार्य आदेश, कुल 1.75 करोड़ का खेल।
सोनाराम पटेल (SE/XEN): 83 कार्य आदेश, 38 लाख का गबन।
भंवराराम चौधरी (XEN, सिवाना): 50 कार्य आदेश, 14.90 लाख की हेराफेरी।
मुकेश छाजेड़ (XEN, बाड़मेर): 36 कार्य आदेश, 10.67 लाख का घोटाला।
मेताराम चौधरी (XEN, गुड़ामालानी): 30 कार्य आदेश, 8.85 लाख की बंदरबांट।
कागजों पर अर्थिंग और फर्जी जंगल की कटाई
घोटालेबाजों की हिम्मत तो देखिए, इन्होंने न सिर्फ सामान के दाम बढ़ाए, बल्कि जो काम कभी हुआ ही नहीं, उसका भी पैसा डकार गए।
फर्जी अर्थिंग:
जहाँ 10 फीट पाइप लगना था, वहां केवल 2-3 फीट का टुकड़ा गाड़ दिया गया। गहराई भी 10.5 फीट की जगह सिर्फ 7 फीट दिखाई गई। एक ही ट्रांसफार्मर की अलग-अलग एंगल से फोटो खींचकर करोड़ों का भुगतान उठा लिया गया।
पेड़ों की काल्पनिक कटाई:
बाड़मेर जैसे रेतीले इलाके में जहाँ गिनती के पेड़ हैं, वहां कागजों पर 1,10,998 पेड़ों की छंटाई दिखा दी गई। भौगोलिक रूप से यह असंभव है, लेकिन डिस्कॉम के लिए यह कमाई का जरिया बन गया।
तीन चहेती फर्मों पर मेहरबानी
बीकानेर की तीन फर्में—रोहिणी, कमल आनंद और नंदिनी एंटरप्राइजेज—जिनका मालिक एक ही है, उन्हें 5.25 करोड़ के टेंडर दे दिए गए। कोविड लॉकडाउन के दौरान जब पूरी दुनिया ठप थी, तब इन फर्मों को बिना किसी रिकॉर्ड के 6.22 लाख का भुगतान कर दिया गया।
EXPOSE NOW का सवाल?
डिस्कॉम के सचिव अमानुल्ला खान कह रहे हैं कि “निर्णय अंडर प्रोसेस है।” लेकिन सवाल यह है कि 20 महीने तक भ्रष्टाचारियों को संरक्षण किसने दिया? क्या सिर्फ चार्जशीट देना काफी है या इन लुटेरों से जनता की एक-एक पाई वसूल कर इन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा?
