सावधान स्कूल संचालक! 15 अप्रैल तक होगी निजी स्कूलों की जांच, खास दुकान से सामान खरीदने के लिए मजबूर करने पर गिरेगी गाज

राजस्थान के प्राइवेट स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने और अपनी मनमानी थोपने की शिकायतों को देखते हुए राज्य के शिक्षा विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है। राज्य सरकार ने सभी ब्लॉक स्तर पर निगरानी समितियां गठित कर स्कूलों की सघन जांच करने के आदेश जारी किए हैं।

यूनिफॉर्म और किताब बिक्री की होगी कड़ाई से जांच शिक्षा विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से ही यूनिफॉर्म, किताबें, जूते या अन्य स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने निर्देश जारी किए हैं कि सभी मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र में तीन सदस्यीय जांच दल गठित करें। इन टीमों का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि में शामिल न हों और न ही अभिभावकों पर दबाव बनाएं।

समय सीमा तय: 20 अप्रैल तक सौंपनी होगी रिपोर्ट विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक सख्त समय सीमा (Deadline) निर्धारित की है:

  • 15 अप्रैल: सभी स्कूलों के निरीक्षण और जांच की अंतिम तिथि।
  • 20 अप्रैल: जांच रिपोर्ट विभाग के पास जमा करने की अनिवार्य तारीख। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

फीस वृद्धि पर भी रहेगी नजर आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नियम के मुताबिक निजी स्कूल तीन साल में केवल एक बार ही फीस बढ़ा सकते हैं। हालांकि, अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल हर साल फीस में बढ़ोतरी कर रहे हैं। विभाग इन टीमों के माध्यम से फीस वृद्धि के रिकॉर्ड की भी जांच करवाएगा।

अभिभावकों की मांग- ‘कागजी आदेश नहीं, धरातल पर हो काम’ हालांकि सरकार के इस कदम का स्वागत हो रहा है, लेकिन अभिभावक समूहों में अब भी संशय बना हुआ है। अभिभावकों का कहना है कि ऐसे आदेश हर साल जारी होते हैं, लेकिन प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव में स्कूल संचालक फिर भी मनमानी करते हैं। उन्होंने मांग की है कि इस बार जांच केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित न रहे, बल्कि दोषी स्कूलों की मान्यता रद्द करने जैसी ठोस कार्रवाई की जाए।

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस बार की समयबद्ध जांच प्रणाली निजी स्कूलों की बेलगाम होती फीस और कमीशनखोरी के खेल पर लगाम लगा पाएगी या नहीं।

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