‘भारत की अस्मिता का प्रहरी है चित्तौड़गढ़’: जौहर श्रद्धांजलि समारोह में योगी आदित्यनाथ ने भरा जोश, सनातन की मर्यादा को बताया अमर

Rakhi Singh
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चित्तौड़गढ़ |

मेवाड़ की पावन धरा और शौर्य के प्रतीक चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर आयोजित ‘जौहर श्रद्धांजलि समारोह’ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिरकत की। जौहर की ज्वाला को नमन करते हुए उन्होंने नारी शक्ति, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक एकता पर कड़ा संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि नारी की गरिमा और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए उनकी सरकार में कोई जगह नहीं है।

वीरांगनाओं को नमन और कालिका माता के दर्शन

योगी आदित्यनाथ सुबह 11:31 बजे केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ चित्तौड़गढ़ पहुंचे। दुर्ग पहुंचकर उन्होंने सबसे पहले ‘जौहर स्थली’ पर वीरांगनाओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने शक्ति स्वरूपा कालिका माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की।

अपराधियों को सीधी चेतावनी: “यमराज करेगा इंतजार”

करीब 45 मिनट के अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के सुरक्षा मॉडल का जिक्र करते हुए कहा:

“याद रखना, अगर किसी ने किसी बहन-बेटी की सुरक्षा पर हाथ डालने का दुस्साहस किया, तो अगले चौराहे पर यमराज उसका इंतजार कर रहा होगा। उत्तर प्रदेश में आज बेटियां रात की शिफ्ट में भी बेखौफ काम कर रही हैं, यही नारी सुरक्षा की असली गारंटी है।”

उन्होंने महारानी पद्मिनी के जौहर को नारी गरिमा का वैश्विक प्रतीक बताया और कहा कि यह संकल्प आज भी भारत की अस्मिता को झकझोर रहा है।

राजस्थान से यूपी का नाता: “दादागुरु यहीं से गए थे”

मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि आज उत्तर प्रदेश में जो भी सकारात्मक परिवर्तन दिख रहा है, उसके पीछे राजस्थान की इस वीर भूमि का ‘तेज’ है। उन्होंने साझा किया कि उनके पूज्य दादागुरु इसी भूमि से गोरखपुर गए थे। चित्तौड़गढ़ दुर्ग को उन्होंने महज पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि “भारत की अस्मिता का प्रहरी” करार दिया।

जातिवाद पर प्रहार और सनातन का संकल्प

देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए योगी ने जातिवाद को राष्ट्र की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बताया। उन्होंने कहा:

  • जातिवाद: यह राजनीति भारत की नींव को कमजोर कर रही है। क्षुद्र मतभेदों से ऊपर उठकर समाज को एकजुट होना होगा।
  • सनातन मर्यादा: सनातन धर्म एक जीवन शैली है जो त्याग और वीरता पर टिकी है। इसे दुनिया की कोई शक्ति नहीं मिटा सकती।

मंच पर दिग्गजों का जमावड़ा

इस आयोजन में महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़, खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़, सहकारिता मंत्री गौतम दक, शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और विधायक चंद्रभान सिंह आक्या सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। विधायक आक्या के संबोधन पर योगी आदित्यनाथ मुस्कुराते हुए नजर आए, जब उन्होंने योगी की तुलना ‘हिंदू सम्राट’ के रूप में की।


जौहर मेले का संक्षिप्त इतिहास

  • शुरुआत: 1948 में एक हवन के रूप में।
  • नामकरण: 1986 में औपचारिक रूप से ‘जौहर मेला’ नाम मिला।
  • उद्देश्य: प्रतिवर्ष मार्च के महीने में वीरांगनाओं के बलिदान को याद करना और नई पीढ़ी को शौर्य गाथाओं से परिचित कराना।
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