राजस्थान की विश्व प्रसिद्ध ‘झीलों की नगरी’ उदयपुर अब बेतरतीब विस्तार और ट्रैफिक के भारी दबाव से मुक्त होकर एक सुनियोजित आधुनिक शहर बनने की राह पर है। उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) ने साल 2047 को लक्ष्य मानकर एक व्यापक विजन प्लान और मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य शहर को अगले 20 वर्षों की जरूरतों के हिसाब से तैयार करना है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के समक्ष इस ब्लूप्रिंट को पेश करने के बाद, अब UDA इसे धरातल पर उतारने की तैयारियों में जुट गया है। इस योजना के तहत न केवल शहर के भीतर के ट्रैफिक जाम को खत्म करने पर फोकस है, बल्कि बाहरी क्षेत्रों में ऐसी कनेक्टिविटी विकसित की जा रही है कि भारी वाहनों को शहर के अंदर प्रवेश करने की आवश्यकता ही न पड़े।
इस विजन प्लान की सबसे खास बात ‘महाराणा प्रताप थीम रोड’ है, जिसे प्रतापनगर-बलीचा बाइपास पर विकसित किया जाएगा। इसे सिर्फ यातायात का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यटन और सौंदर्यीकरण का केंद्र बनाया जाएगा, जिसमें विशेष लाइटिंग और थीम बेस्ड डिजाइन होंगे। इसी तरह, प्रसिद्ध रानी रोड के 7 से 8 किमी क्षेत्र को भी पर्यटन आकर्षण के रूप में सुधारा जाएगा। बुनियादी ढांचे की बात करें तो भुवाणा से अंबेरी चौराहे तक की सड़क को सिक्स लेन किया जाएगा और आरके सर्कल का विस्तार होगा। इसके साथ ही बलीचा और पारस तिराहे पर फ्लाइओवर का निर्माण जारी है, जबकि बलीचा क्षेत्र में एलिवेटेड रोड की भी योजना है।
शहर के विस्तार को व्यवस्थित बनाने के लिए UDA के दायरे में आने वाले 205 गांवों के विकास का खाका भी तैयार किया गया है। इन गांवों के लिए पहली बार वैज्ञानिक तरीके से मास्टर प्लान बनाया जा रहा है, जिसमें सड़कें, ड्रेनेज और व्यावसायिक क्षेत्रों का निर्धारण होगा। इस कार्य के लिए सर्वे ऑफ इंडिया से तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है। बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ प्रशासन गांवों में पट्टों के कन्वर्जन, नामांतरण और लीज प्रक्रिया को भी सरल बनाने जा रहा है, जिससे हजारों स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी। उदयपुर एक प्रमुख पर्यटन नगरी है, ऐसे में यह मास्टर प्लान भविष्य की आबादी और पर्यटकों के बढ़ते दबाव को संतुलित करने में मील का पत्थर साबित होगा।
