Swachh Bharat Mission: 694cc की गाड़ी पर 2 टन कचरे का बोझ, विशेषज्ञों ने दी इंजन सीज होने की चेतावनी

स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों से कचरा उठाने के लिए पंचायती राज विभाग ने तीन हजार वाहनों की खरीद की तैयारी कर ली है, लेकिन इस खरीद पर अब बड़ा तकनीकी सवाल खड़ा हो गया है। रेट कॉन्ट्रैक्ट में 694 सीसी के वाहन का उपयोग तय किया गया है। वाहन का वजन 1700 किलो रखा है और उसी से 2 टन कचरा उठाने की क्षमता निर्धारित की है। प्रति वाहन कीमत 7.50 लाख तय है।

एक्सपर्ट की राय: इंजन पर बढ़ेगा दबाव

भास्कर ने इस तकनीकी व्यवस्था की एक्सपर्ट से पड़ताल कराई तो सामने आया कि इस श्रेणी का वाहन 2 टन भार उठाने के लिहाज से उपयुक्त नहीं है। एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसे वाहन व्यावहारिक रूप से 800 से 900 किलो तक ही सुरक्षित लोड उठा सकते हैं। इससे ज्यादा भार पड़ा तो इंजन पर अत्यधिक दबाव आएगा, हीट बढ़ेगी, इंजन सीज, ब्रेकिंग सिस्टम जवाब दे सकता है और हादसे की आशंका भी बढ़ जाएगी।

विशेषज्ञों का साफ कहना है कि गांवों की परिस्थितियों को देखते हुए 1200 से 1600 सीसी के टर्बो इंजन वाले वाहन की जरूरत है। ऐसा नहीं हुआ तो गांवों की स्वच्छता व्यवस्था भी प्रभावित होगी और 225 करोड़ की पूरी योजना सवालों में घिर सकती है। रेट कॉन्ट्रैक्ट का सबसे बड़ा असर यह होगा कि जो कंपनी इस प्रक्रिया में क्वालिफाई करेगी, पंचायतों को उसी कंपनी से वाहन खरीदने होंगे। पहले चरण में 3 हजार से अधिक आबादी वाली पंचायतों को वाहन दिए जाएंगे।


कचरा व्यवस्था में दबे 5 बड़े सवाल?

  • 694 सीसी वाहन से 2 टन कचरा उठाने का आधार क्या?
  • जब एक्सपर्ट 800-900 किलो से ज्यादा सुरक्षित नहीं मान रहे, तब यह क्षमता क्यों तय की गई?
  • क्या तकनीकी शर्तें किसी खास कंपनी के अनुकूल बनाई गई हैं?
  • पंचायतों को विकल्प क्यों नहीं दिया?
  • अगर वाहन फेल हुए तो 225 करोड़ की जवाबदेही कौन लेगा?

सीधी बात – मुरारीलाल शर्मा, ज्वॉइंट डायरेक्टर

सवाल: ये वाहन इतना वजन कैसे झेलेंगे? जवाब: ये तो कमेटी ने फाइनल किया है। कई जगह पर ये ही वर्किंग में है।

सवाल: गांवों की सफाई का मुद्दा है और एक्सपर्ट तो इसे खारिज कर रहे हैं? जवाब: कमेटी ने कुछ सोच समझकर ही ये सब तय किया गया होगा।

सवाल: चर्चा है किसी कंपनी को फायदा पहुंचाने की नियत से सब प्लान हुआ है? जवाब: ये खरीद पंचायत स्तर पर जरूरत पड़ने पर होगी। हम सीधे तौर पर नहीं खरीद रहे हैं। दावे से कह सकता हूं किसी को कोई फायदा नहीं पहुंचेगा। वैसे भी टेंडर तो प्रोसेस में है।


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