जोधपुर, राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (RIFF) के 12वें संस्करण के तीसरे दिन सोमवार को ‘सिनेमास्थान’ की गूँज के बीच एक बेहद भावुक और वैचारिक सत्र आयोजित किया गया। प्रतिष्ठित फिल्म निर्माता और निर्देशक सीमा कपूर की आत्मकथा “यूँ गुजरी है अब तलक” पर आधारित इस विशेष संवाद कार्यक्रम में सिनेमा, संघर्ष और आत्मखोज के कई परतें खुलीं।
जोधपुर के मिराज सिनेमा (ब्लू सिटी मॉल) में आयोजित इस सत्र का संचालन प्रोग्राम होस्ट अंशु हर्ष ने किया।
संघर्ष से आत्मखोज तक की यात्रा

संवाद के दौरान सीमा कपूर ने अपनी पुस्तक के शीर्षक को सार्थक करते हुए बताया कि यह आत्मकथा उनके जीवन के उन कठिन दौर का निचोड़ है, जहाँ उन्होंने रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी लंबा संघर्ष किया। उन्होंने कहा:
“मैंने अपनी कहानी को पूरी ईमानदारी के साथ लिखा है। यह किसी एक स्त्री की नहीं, बल्कि उन सभी की कहानी है जो जीवन की राह में खुद को तलाश रहे हैं। सच्चाई का अपना एक अलग आत्मसम्मान होता है, जिसे शब्दों में पिरोना एक आध्यात्मिक प्रक्रिया जैसा था।”
थियेटर का गिरता दौर और भवानीमंडी का जुड़ाव
सीमा कपूर ने अपने बचपन और पिता के संघर्षों को याद करते हुए बताया कि उनके पिता की थियेटर कंपनी राजस्थान के गाँव-गाँव में कला का प्रचार करती थी। लेकिन 1969 के बाद जब सिनेमा का प्रभाव बढ़ा, तो थियेटर कंपनियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया। इसी संघर्ष के दौरान उनका परिवार राजस्थान के भवानीमंडी में आकर बस गया।
ओम पुरी के साथ बिताए 38 वर्षों का संस्मरण
अपने दिवंगत पति और दिग्गज अभिनेता ओम पुरी के साथ अपने संबंधों पर बात करते हुए सीमा कपूर भावुक दिखीं। उन्होंने 1979 से 2017 तक की उस अनूठी यात्रा को अनुभवों का खजाना बताया। इसके साथ ही उन्होंने अपने भाई और मशहूर लेखक-निर्देशक रणजीत कपूर के रचनात्मक प्रभाव का भी उल्लेख किया।
स्वतंत्रता बनाम स्वच्छंदता: महिला सशक्तिकरण पर विचार
महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर बेबाकी से राय रखते हुए सीमा कपूर ने कहा कि महिलाओं के लिए आर्थिक और वैचारिक आजादी अनिवार्य है। हालांकि, उन्होंने एक महत्वपूर्ण लकीर खींचते हुए कहा:
- स्वतंत्रता: यह समाज और व्यक्तित्व को सशक्त बनाती है।
- स्वच्छंदता: यह संतुलन बिगाड़कर समाज को कमजोर करती है।
सत्र के समापन पर उन्होंने दर्शकों के साथ सीधा संवाद किया और उनके जीवन से जुड़े कई पेचीदा सवालों के उत्तर दिए।
