RIFF 2026: “फॉलोअर्स नहीं, हुनर दिलाएगा काम”, जोधपुर में कास्टिंग किंग मुकेश छाबड़ा ने दिए सफलता के मंत्र

जोधपुर, राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (रिफ) के 12वें संस्करण के चौथे दिन मंगलवार को बॉलीवुड के मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर और फिल्म निर्देशक मुकेश छाबड़ा युवाओं के बीच पहुंचे। मिराज सिनेमा के ‘सिनेमास्थान’ मंच पर “अभिनय की कला की खोज” विषय पर आयोजित मास्टरक्लास में उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाले कलाकारों को बेबाकी से सफलता का रास्ता दिखाया।

सोशल मीडिया बनाम थिएटर: असली स्टार कौन?

सत्र के दौरान मुकेश छाबड़ा ने एक बड़ा संदेश देते हुए कहा कि आज के दौर में इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या किसी को अभिनेता नहीं बना सकती। उन्होंने स्पष्ट किया:

“सोशल मीडिया एक मंच हो सकता है, लेकिन स्टार केवल थिएटर और अभिनय का प्रशिक्षण ही बनाता है। हम किसी को उसके फॉलोअर्स देखकर नहीं, बल्कि कहानी की जरूरत और कैरेक्टर के अनुसार कास्ट करते हैं। एनएसडी (NSD) जैसे संस्थानों से निकले कलाकार आज भी अपनी गहन तैयारी के कारण प्राथमिकता पाते हैं।”

फेक कास्टिंग और धोखाधड़ी से रहें सावधान

इंडस्ट्री में होने वाली धोखाधड़ी पर छाबड़ा ने युवाओं को सतर्क किया। उन्होंने कहा कि फर्जी लोग हर क्षेत्र में हैं, लेकिन ग्लैमर वर्ल्ड में यह ज्यादा दिखता है। उन्होंने सलाह दी कि:

  • किसी भी कॉल या मैसेज पर भरोसा करने से पहले कंपनी के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज को चेक करें।
  • फिल्म इंडस्ट्री में काम दिलाने के नाम पर पैसों की मांग करने वाले हमेशा फर्जी होते हैं।
  • जागरूकता और सही जानकारी ही इससे बचने का एकमात्र तरीका है।

राजस्थान में सिनेमा का सुनहरा भविष्य

राजस्थान के प्रति अपने विशेष प्रेम का जिक्र करते हुए छाबड़ा ने बताया कि पिछले तीन महीनों में वे 20 बार राजस्थान आ चुके हैं। जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर में सिनेमाई गतिविधियों का बढ़ना इस बात का संकेत है कि यहाँ जल्द ही कुछ बड़ा और सकारात्मक होने वाला है।

युवाओं की शंकाओं का समाधान

सत्र के दौरान उन्होंने युवा कलाकारों वाजिद खान, जिया परिहार और शिवानी के सवालों के विस्तार से जवाब दिए:

  • धैर्य और मेहनत: कास्टिंग में समय लगना सामान्य है, प्रोफाइल कभी भुलाई नहीं जाती, बस सही प्रोजेक्ट का इंतजार रहता है।
  • निरंतर अभ्यास: उन्होंने कलाकारों को सलाह दी कि वे अवसर मिलने का इंतजार करने के बजाय थिएटर और अभिनय प्रशिक्षण पर लगातार काम करें। टैलेंट कभी व्यर्थ नहीं जाता।
  • अपनी पहचान बनाएं: जुड़वा कलाकारों (Twins) को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि किसी खास रोल के इंतजार के बजाय अपनी स्वतंत्र पहचान पर काम करना चाहिए।

कास्टिंग डायरेक्टर का नजरिया

अपने शुरुआती संघर्ष को याद करते हुए मुकेश छाबड़ा ने बताया कि उन्होंने दिल्ली में एक निजी कंपनी में नौकरी से शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि फिल्म की सफलता की नींव सही कास्टिंग ही होती है, और एक कास्टिंग डायरेक्टर का काम केवल अभिनेता को नहीं, बल्कि कहानी के ‘सच’ को तलाशना होता है।

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