देश में ऑनलाइन फ्रॉड के केसस में खासी बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। कई लोग इनका शिकार बन अपनी गाढ़ी कमाई को आंशिक से पूरे तक गवां बैठते हैं। ऐसे में, भारतीय रिजर्व बैंक ने नया नियम (rule) पेश किया है। अब, अगर आपके साथ ऑनलाइन फ्रॉड हो जाता है या फिर यूपीआई (UPI) के जरिए धोखाधड़ी होती है तो आपको मुआवजा मिल सकता है.
सोचिए, इमेजिन कीजिए या यूं कहें मान लीजिए… एक दिन आपके मोबाइल पर एक मैसेज आता है कि आपके खाते से बड़ी रकम (जो कितनी भी हो सकती है पर यहां उदाहरण के लिए 30,000 रुपए मान लेते हैं) कट गई है; आपने कभी ये पेमेंट किया ही नहीं था, ना ही कोई पेमेंट अप्रूव की थी। आप तुरंत बैंक को कॉल कर उनसे बात करते हैं पर बैंक भी ये नहीं बता पाता कि आपको आपके पैसे कैसे मिलेंगे?
फिर होता है रूटीन… आप शिकायत दर्ज कराते हैं कि आपके खाते से 30,000 रुपए का ऑनलाइन फ्रॉड हुआ है। सवाल हमेशा रहेगा कि आपको आपका ही पैसा वापस मिलेगा या नहीं? ऐसे केसस के निस्तारण पर गौर करें तो नतीजा ये सामने आता है कि ज्यादातर ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में कस्टमर्स का पैसा रिकवर नहीं हो पाता। लेकिन, अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ऐसे मामलों में सीधे तौर पर शामिल हो चुका है।

RBI का नया नियम लगाएगा धोखे की चोट पर मरहम
RBI ने एक नया नियम निकाला है। नियम के तहत, अगर आपके साथ ऑनलाइन फ्रॉड या UPI के जरिए स्कैम होता है तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आपको मुआवजे का भुगतान करेगा।

जानिए वो तमाम फ्रॉड जिसपर और कबसे मिलेगा मुआवजा
ये रूल स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और स्थानीय क्षेत्र बैंक को छोड़कर सभी कमर्शियल बैंकों पर लागू होते हैं। 1 जनवरी, 2027 से उस तारीख को या उसके बाद किए गए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के लिए प्रभावी होंगे।
आसान भाषा में कहें तो आज आप जितने भी प्रकार के डिजिटल भुगतान करते हैं वे सभी इसमें शामिल हैं, जैसे UPI ट्रांसफर, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान (चाहे कार्ड स्वाइप या टैप कर किए गए हों या कार्ड डिटेल्स ऑनलाइन दर्ज कर किए गए हों)। अगर डिजिटल माध्यम से पैसे का लेन-देन हुआ है तो वो इस कैटेगरी में रखा जाएगा।
भुगतान करेगा कौन?

कितना मिलेगा मुआवजा?
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि मुआवजे का भुगतान पूरी लाइफ में एक ही बार और किसी एक व्यक्ति को किया जाएगा। यह भुगतान 25,000 रुपए या 85% जो भी कम हो का किया जाएगा। मतलब मान लीजिए कि किसी व्यक्ति के साथ 40 हजार रुपए की ठगी हुई है और कस्टमर ने शिकायत दर्ज कराई है तो उसे अधिकतम 25,000 रुपए का ही मुआवजा दिया जाएगा। अगर वो दोबारा फ्रॉड का शिकार होता है तो उसे कोई मुआवजा नहीं मिलेगा।
कौन कितना पेमेंट करेगा?
छोटे धोखाधड़ी के मामलों में (खासकर 29,412 रुपए से कम के नुकसान वाले मामलों में) मुआवजा नुकसान का 85% होता है। घरेलू धोखाधड़ी के मामलों में 65% रिजर्व बैंक द्वारा, 10% ग्राहक के बैंक द्वारा और बाकी 10% लाभार्थी बैंक द्वारा वहन किया जाएगा। लाभार्थी बैंक वह बैंक है जिसने सबसे पहले आपका चोरी हुआ पैसा प्राप्त किया था।
29,412 रुपए और 50,000 रुपए के बीच के थोड़े बड़े नुकसान के लिए (जहां मुआवजे की अधिकतम सीमा 25,000 रुपए है) RBI, ग्राहक का बैंक और लाभार्थी बैंक 19,118 रुपए, 2,941 रुपए और 2,941 रुपए देंगे।