छत पर चमकेगा ‘सूरज’ और जेब में बचेगा पैसा: राजस्थान सौर ऊर्जा में देश में तीसरे नंबर पर, ऐसे उठाएं ₹95,000 की सब्सिडी का लाभ

राजस्थान में बिजली बिल की टेंशन अब बीते दौर की बात होने वाली है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश ‘ऊर्जा आत्मनिर्भरता’ की दिशा में एक बड़ी क्रांति का गवाह बन रहा है। राजस्थान में अब तक 1 लाख 43 हजार 965 परिवारों का बिजली बिल ‘जीरो’ हो चुका है। यह कोई चुनावी वादा नहीं, बल्कि प्रदेश के उन घरों की हकीकत है जिन्होंने सौर ऊर्जा को अपनाया है।

सौर ऊर्जा में राजस्थान की ‘हैट्रिक’ रूफ टॉप सोलर (छत पर सौर ऊर्जा) के मामले में राजस्थान ने लंबी छलांग लगाते हुए पूरे देश में तीसरा स्थान हासिल कर लिया है। वर्तमान में गुजरात और महाराष्ट्र के बाद राजस्थान 2,090 मेगावाट क्षमता के साथ इस सूची में दिग्गज बनकर उभरा है। प्रदेश में सौर ऊर्जा के प्रति उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ प्रतिदिन औसतन 700 नए उपभोक्ता अपनी छत पर सोलर प्लांट लगवा रहे हैं।

₹95,000 तक की भारी सब्सिडी का फायदा सरकार उपभोक्ताओं को दोहरी सब्सिडी देकर प्रोत्साहित कर रही है, जिससे सोलर लगवाना अब बेहद किफायती हो गया है:

  • पीएम सूर्यघर योजना: इसके तहत उपभोक्ताओं को उनके बैंक खाते में सीधे 78,000 रुपये तक की सब्सिडी मिल रही है।
  • अतिरिक्त राज्य सब्सिडी: जयपुर, जोधपुर और अजमेर डिस्कॉम द्वारा 150 यूनिट फ्री बिजली योजना के तहत 17,000 रुपये की अतिरिक्त छूट दी जा रही है।
  • इस तरह एक सामान्य उपभोक्ता को कुल 95,000 रुपये तक की बचत हो रही है।

लोन की आसान सुविधा और सरल प्रक्रिया अगर बजट की समस्या है, तो एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे प्रमुख बैंक मात्र 5.75 प्रतिशत की ब्याज दर पर आसान लोन उपलब्ध करा रहे हैं। अब तक करीब 1 लाख लोगों ने इस सुविधा का लाभ उठाया है।

प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए बिजली कंपनियों ने आवेदन शुल्क, सिक्योरिटी राशि और मीटर टेस्टिंग फीस को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। यह सारा खर्च प्लांट लगने के बाद बिजली बिल की किस्तों के माध्यम से लिया जाएगा। प्रदेश में 1896 रजिस्टर्ड वेंडर्स की टीम इस काम को सुगम बनाने के लिए घर-घर सेवाएं दे रही है।

औद्योगिक क्षेत्र में भी दबदबा घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ राजस्थान के उद्योगों ने भी सौर ऊर्जा को अपना ढाल बनाया है। प्रदेश में 32 हजार से अधिक ऐसे उपभोक्ता हैं जिन्होंने 10 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के बड़े प्लांट लगाकर अपनी उत्पादन लागत में भारी कटौती की है।

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