जयपुर: राजस्थान ने अक्षय और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक और बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने घोषणा की है कि ‘पीएम कुसुम योजना’ (कम्पोनेन्ट A और C) के तहत राजस्थान ने 3000 मेगावाट की क्षमता अर्जित कर ली है। मुख्यमंत्री ने इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और राजस्थान की ‘डबल इंजन’ सरकार के प्रयासों को दिया है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से प्रदेश का किसान अब ‘अन्नदाता’ के साथ-साथ ‘ऊर्जादाता’ भी बन रहा है।
किसानों को दिन में बिजली और सौर अनुदान
राज्य सरकार के विशेष प्रयासों के कारण प्रदेश के 22 जिलों में किसानों को अब खेती के लिए दिन के समय बिजली मिल पा रही है। इसके साथ ही, कम्पोनेन्ट ‘B’ के माध्यम से सोलर पंपसेट लगाने पर भारी अनुदान दिया जा रहा है, जिससे किसान ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए मेहनती किसानों, ऊर्जा विभाग और डिस्कॉम्स के कर्मचारियों की सराहना की है।
ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनता राजस्थान
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान के बढ़ते कदम प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह ‘आत्मनिर्भर’ बनाएंगे। ‘समृद्ध किसान और खुशहाल राजस्थान’ के संकल्प के साथ सरकार सौर ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को और मजबूत कर रही है। राजस्थान आज न केवल सौर ऊर्जा उत्पादन में बल्कि पीएम कुसुम योजना के क्रियान्वयन में भी देश का सिरमौर राज्य बनकर उभरा है।
