जयपुर: राजस्थान में पंचायत चुनावों की सरगर्मियों के बीच ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के कार्यकाल को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल की अवधि को लेकर कई तरह की अफवाहें और चर्चाएं चल रही थीं, जिस पर अब राज्य निर्वाचन आयोग ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
राजस्थान के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए इन सभी भ्रामक जानकारियों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सरपंच से लेकर जिला प्रमुख तक, 5 साल ही रहेगा कार्यकाल
मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने अपनी पोस्ट में साफ तौर पर बताया है कि ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के साथ-साथ इनके निर्वाचित पदाधिकारियों और सदस्यों का कार्यकाल पहले की तरह ही 5 वर्ष का रहेगा।
- ग्राम पंचायत: सरपंच, उपसरपंच और वार्ड पंच का कार्यकाल 5 साल रहेगा।
- पंचायत समिति: प्रधान, उपप्रधान और सदस्यों का कार्यकाल भी 5 साल निर्धारित है।
- जिला परिषद: प्रमुख, उपप्रमुख और सभी सदस्यों के कार्यकाल की अवधि भी पांच वर्ष ही होगी।
यानी इस बार पंचायत चुनाव में जीतकर आने वाले किसी भी जनप्रतिनिधि के कार्यकाल की सीमा में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। आयोग ने आम जनता और उम्मीदवारों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों से सतर्क रहें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।
14,403 ग्राम पंचायतों में हो रहे हैं चुनाव गौरतलब है कि राजस्थान में ‘पंचायत चुनाव 2026’ को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही विस्तृत कार्यक्रम घोषित कर चुका है। प्रदेश भर में चुनाव का बिगुल बज चुका है और ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक गतिविधियां अपने चरम पर हैं।
- प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों
- 457 पंचायत समितियों
- 41 जिला परिषदों
इन सभी के चुनाव कुल चार चरणों में संपन्न कराए जा रहे हैं। चुनाव कार्यक्रम सामने आने के बाद से ही सरपंच से लेकर जिला परिषद सदस्य तक के पदों पर उम्मीदवार पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में उतर चुके हैं।
अपुष्ट खबरों पर न दें ध्यान
चुनावों के इस महत्वपूर्ण समय में सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रामक खबरें तेजी से वायरल होती हैं। ऐसे में मुख्य निर्वाचन आयुक्त का यह स्पष्टीकरण बेहद अहम माना जा रहा है। मतदाताओं और चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशियों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह के अपुष्ट संदेशों के बजाय निर्वाचन आयोग द्वारा जारी की गई आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।