जयपुर, गुलाबी नगरी में आयोजित हो रहे ‘नो योर आर्मी’ मेले में इस बार एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर प्रदर्शित की गई है, जिसे देख हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो रहा है। 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान की करारी हार और भारतीय सेना के अदम्य साहस की प्रतीक— लेफ्टिनेंट जनरल ए.ए.के. नियाज़ी की मर्सिडीज-बेंज़ स्टाफ कार—मेले में आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है।
आत्मसमर्पण की मूक गवाह है यह कार
यह वही आलीशान मर्सिडीज कार है, जिसका उपयोग पाकिस्तान के तत्कालीन पूर्वी सेना कमांडर जनरल नियाजी करते थे। 16 दिसंबर 1971 को जब ढाका में पाकिस्तान ने 93,000 सैनिकों के साथ बिना शर्त आत्मसमर्पण (Surrender) किया, तब भारतीय सेना ने इस वाहन को अपने कब्जे में लिया था।
- ऐतिहासिक महत्व: यह कार केवल एक वाहन नहीं, बल्कि पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सैन्य कमान के पतन और बांग्लादेश के उदय की जीवंत गवाह है।
- युद्ध ट्रॉफी: वर्तमान में इसे मुख्यालय ईस्टर्न कमांड में एक ‘युद्ध ट्रॉफी’ (War Trophy) के रूप में अत्यंत सम्मान और सुरक्षा के साथ संरक्षित रखा गया है।
पहली बार आमजन के करीब पहुंची ‘विजय ट्रॉफी’
यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में नागरिकों, युवाओं और विद्यार्थियों को इस ऐतिहासिक धरोहर को इतने नजदीक से देखने का अवसर मिल रहा है। मेले में आने वाले लोग इस गाड़ी के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं और 1971 के युद्ध के उस गौरवशाली इतिहास को याद कर रहे हैं जब भारत ने विश्व का भूगोल बदल दिया था।
युवाओं में देशभक्ति का संचार
मेले में आए विद्यार्थियों के लिए यह मर्सिडीज कौतूहल और गर्व का विषय बनी हुई है। सेना के अधिकारियों द्वारा इस वाहन के पीछे की कहानी सुनकर युवाओं में राष्ट्रभक्ति और सेना के प्रति सम्मान का भाव और गहरा हो रहा है।
“इस कार को देखना ऐसा है जैसे हम इतिहास के उस स्वर्णिम क्षण को जी रहे हों जब हमारे वीरों ने दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।” — मेले में आए एक युवा छात्र की प्रतिक्रिया।
सेना और नागरिकों के बीच मजबूत सेतु
‘नो योर आर्मी’ मेला सेना दिवस परेड-2026 के कार्यक्रमों की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस प्रकार की प्रदर्शनियों का उद्देश्य आम जनता को भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास, उनके बलिदान और आधुनिक सैन्य शक्ति से परिचित कराना है, जिससे सशस्त्र बलों और नागरिकों के बीच विश्वास और गर्व का रिश्ता और मजबूत हो सके।
