जयपुर। राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में लगातार हो रही देरी पर राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने राज्य चुनाव आयुक्त से स्पष्ट शब्दों में पूछा कि आखिर चुनाव कार्यक्रम घोषित करने में इतनी देरी क्यों हो रही है और आयोग ऐसा क्यों चाहता है कि उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए। हाईकोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया कि वह पांच दिनों के भीतर पंचायत और निकाय चुनाव की संभावित तारीखों की जानकारी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे।
अदालत ने जताई सख्त नाराजगी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव समय पर कराना संवैधानिक दायित्व है। प्रशासनिक या अन्य कारणों का हवाला देकर चुनावों को अनिश्चितकाल तक टालना स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि उसके पूर्व आदेशों का पालन नहीं किया जाता है तो यह गंभीर मामला माना जाएगा।
राज्य चुनाव आयुक्त से मांगा स्पष्ट जवाब
सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयुक्त अदालत में उपस्थित हुए। कोर्ट ने उनसे पूछा कि चुनाव कार्यक्रम घोषित करने में अब तक क्या बाधाएं हैं और आखिर आयोग चुनाव तिथियों की घोषणा क्यों नहीं कर पा रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि आयोग की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो अवमानना की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
पांच दिन में चुनाव कार्यक्रम बताने के निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह अगले पांच दिनों के भीतर पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की प्रस्तावित समय-सीमा और कार्यक्रम की जानकारी कोर्ट में प्रस्तुत करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि चुनाव कराने के लिए ठोस कार्ययोजना भी बतानी होगी।
लंबे समय से लंबित हैं चुनाव
राजस्थान में कई पंचायतों और नगरीय निकायों का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद चुनाव नहीं हो पाए हैं। इस देरी को लेकर पहले भी विभिन्न याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि समय पर चुनाव नहीं होने से स्थानीय स्वशासन व्यवस्था प्रभावित हो रही है और संविधान की भावना के विपरीत स्थिति पैदा हो रही है।
अवमानना याचिका पर चल रही है सुनवाई
यह सुनवाई हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों की पालना नहीं होने के आरोप में दायर अवमानना याचिका पर हो रही है। अदालत यह जानना चाहती है कि उसके निर्देशों के बावजूद चुनाव कार्यक्रम घोषित क्यों नहीं किया गया। यदि आयोग निर्धारित समय में स्पष्ट रोडमैप पेश नहीं करता है तो उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि राज्य चुनाव आयोग निर्धारित पांच दिनों के भीतर चुनाव कार्यक्रम प्रस्तुत करता है, तो पंचायत और निकाय चुनावों की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना बन सकती है। वहीं, समयसीमा का पालन नहीं होने पर आयोग को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
