जयपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाई है । जहां देश के अन्य राज्य अभी चैटबॉट्स तक सीमित हैं, वहीं राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग (DoIT&C) ने ‘फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम’ को सफलतापूर्वक लागू कर दिया है । यह एडवांस्ड एआई प्रणाली शासन और कानून व्यवस्था को सुधारने में मील का पत्थर साबित हो रही है ।
1. डमी कैंडिडेट्स पर प्रहार: 50 लाख रिकॉर्ड्स से मिलान । भर्ती परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए विभाग ने एआई-संचालित सिस्टम विकसित किया है ।
- किसी भी संदिग्ध अभ्यर्थी के फोटो का मिलान 50 लाख रिकॉर्ड्स वाले विशाल डेटाबेस से किया जा सकता है ।
- इससे डमी कैंडिडेट को पकड़ना आसान हो गया है, जिससे पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया सुनिश्चित हो रही है ।
2. अपराधियों की पहचान हुई आसान
अपराधियों और आदतन अपराधियों पर नकेल कसने के लिए एक अलग एआई समाधान लागू किया गया है ।
- इस सिस्टम के जरिए आरोपी की फोटो का मिलान 10 लाख आपराधिक रिकॉर्ड्स से किया जाता है ।
- इससे पुराने अपराधियों की पहचान, पैटर्न रिकग्निशन और जांच प्रक्रिया में तेजी आई है ।
3. लावारिस शवों की त्वरित पहचान
एक मानवीय पहल के तहत एआई का उपयोग लावारिस शवों की पहचान के लिए भी किया जा रहा है । अज्ञात शवों के फोटो का मिलान गुमशुदा व्यक्तियों के डेटाबेस से किया जाता है, जिससे उनके परिजनों तक सूचना पहुंचाना संभव हो रहा है ।
