जयपुर। राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों से रोक हटे (तबादला अवधि शुरू हुए) पूरे दस दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में अभी भी सन्नाटा पसरा हुआ है। अब तक किसी भी बड़े या मुख्य विभाग की बड़ी तबादला सूचियां (Transfer Lists) जारी नहीं हो सकी हैं। 19 जून से खुली यह तबादला प्रक्रिया अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है और इसके पूरा होने में अब केवल सात दिन शेष बचे हैं।
समय सीमा तेजी से घटने के कारण शासन सचिवालय से लेकर संभाग और जिला मुख्यालयों तक के कर्मचारियों की निगाहें केवल ट्रांसफर आदेशों पर टिकी हैं। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि अधिकांश विभाग अंतिम समय में ही एकमुश्त सूचियां जारी कर चौंका सकते हैं।
इन बड़े विभागों में नाम जोड़ने-हटाने का खेल जारी
सचिवालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, कई बड़े और मलाईदार विभागों में भारी संख्या में तबादले होने तय हैं। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित विभाग शामिल हैं, जहां प्रस्तावों को अंतिम रूप देने की कवायद बेहद तेज हो गई है:
- कृषि विभाग (Agriculture Department)
- नगरीय विकास (UDH)
- राजस्व विभाग (Revenue Department)
- पुलिस महकमा (Police Department)
- सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD)
देरी की मुख्य वजह:
ज्यादातर विभागों के मंत्रियों और आला अफसरों के स्तर पर सूचियों में अंतिम समय तक ‘नाम जोड़ने और हटाने’ का दौर लगातार जारी है। समीकरणों को साधने और कड़े राजनीतिक दबाव के चलते सूचियां अंतिम रूप लेने के बाद भी अटकी हुई हैं।
नेताओं के आवासों पर ‘सिफारिशों की बाढ़’ और भारी भीड़
तबादला सीजन के आखिरी हफ़्ते में राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की हलचल चरम पर पहुंच गई है। ट्रांसफर की आस लगाए बैठे कर्मचारी और उनके परिजन केवल मंत्रियों और विधायकों के ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के प्रभावशाली स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक के चक्कर काट रहे हैं। जयपुर में मंत्रियों और विधायकों के आवासों पर सुबह होने वाली जनसुनवाई में केवल और केवल तबादला सिफारिशों के लिए ही भारी भीड़ उमड़ रही है।
तबादला कराने के नाम पर ‘ऑफर’ देने वाले गिरोह सक्रिय
“ऊंचे स्तर तक पहुंच का दावा”
सचिवालय के महकमों में अंदरखाने यह गंभीर चर्चा भी चल रही है कि कुछ दलाल, अधिकारी और प्रभावशाली लोग ऊंचे स्तर तक अपनी सेटिंग होने का दावा करते हुए मनचाही जगह ट्रांसफर कराने के ‘ऑफर’ दे रहे हैं। हालांकि, इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कर्मचारियों के बीच इस तरह की डीलिंग की चर्चाएं लगातार आम हैं।
एक्टिव मोड में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB):
शिक्षा, पुलिस, कृषि, ग्रामीण विकास और नगरीय विकास जैसे मलाईदार विभागों में तबादले की गारंटी देकर मोटी रकम वसूलने वाले गिरोह सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं। इस मामले पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के अधिकारियों का कहना है कि हालांकि ऐसे मामलों की अलग से निगरानी का कोई विशिष्ट सिस्टम नहीं है, लेकिन यदि किसी भी स्तर से लेन-देन की कोई शिकायत मिलती है, तो तुरंत ट्रैप की कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल: कब लागू होगी पारदर्शी तबादला नीति?
इस पूरी आपाधापी के बीच राजस्थान प्रशासनिक बेड़े और आम जनता के बीच एक बड़ा सवाल यह भी तैर रहा है कि आखिर राजस्थान में लंबे समय से प्रस्तावित पारदर्शी तबादला नीति (Transfer Policy) कब लागू होगी? नीति लागू न होने के कारण हर बार ट्रांसफर सीजन में इसी तरह की सिफारिशों की दौड़ और भ्रष्टाचार की आशंकाएं जन्म लेती हैं। फिलहाल, सभी की नजरें आगामी 7 दिनों पर टिकी हैं कि सरकार कितनी बड़ी सूचियां जारी करती है।