महिलाओं-बालिकाओं को फोन, मैसेज और सोशल मीडिया से परेशान करने वालों पर शिकंजा; 5100 शिकायतों का रिकॉर्ड खंगाल रही साइबर पुलिस, गंभीर मामलों में FIR तक कार्रवाई
यादवेन्द्र शर्मा
जयपुर। सोशल मीडिया पर किसी महिला या बालिका को डराना-धमकाना अब सिर्फ ऑनलाइन हरकत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी, लगातार फोन या मैसेज करना, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना और डिजिटल माध्यम से मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाले लोगों के खिलाफ राजस्थान साइबर पुलिस ने कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है।
राजस्थान स्टेट साइबर क्राइम के रिकॉर्ड में महिलाओं और बालिकाओं से संबंधित करीब 5100 शिकायतें दर्ज हैं। इन शिकायतों के विश्लेषण के बाद साइबर पुलिस ने अब तक 698 मोबाइल SIM बंद करवाने की कार्रवाई की है। गंभीर मामलों में संबंधित जिला या स्थानीय थाना पुलिस के माध्यम से FIR दर्ज करवाकर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।
यह कार्रवाई केवल किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। साइबर पुलिस शिकायतों के रिकॉर्ड का डेटा एनालिसिस कर यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं एक ही मोबाइल नंबर, एक ही आरोपी या एक ही तरीके से महिलाओं और बालिकाओं को परेशान करने के कई मामले तो नहीं जुड़े हैं।
5100 शिकायतों का रिकॉर्ड, अब डेटा से तलाशे जा रहे अपराध के पैटर्न
साइबर पुलिस के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार महिलाओं और बालिकाओं को फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देने, सोशल मीडिया पर गलत अथवा आपत्तिजनक टिप्पणी करने और मोबाइल के जरिए परेशान करने से जुड़ी करीब 5100 शिकायतें सामने आई हैं। इस डेटाबेस में अप्रैल 2025 से दिसंबर 2025 तक प्राप्त शिकायतों के साथ वर्ष 2026 में अब तक मिली शिकायतें भी शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार वर्ष 2026 में प्राप्त मामलों का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि वर्ष 2025 की शिकायतों पर कार्रवाई जारी है।
अब साइबर पुलिस का फोकस केवल शिकायतों की संख्या गिनने पर नहीं, बल्कि शिकायतों के भीतर छिपे पैटर्न को पहचानने पर है।

महिलाओं-बालिकाओं से जुड़ी साइबर शिकायतें — 5100
रिकॉर्ड में शामिल अवधि:
अप्रैल 2025 से दिसंबर 2025
वर्ष 2026 में प्राप्त शिकायतें
अब तक SIM पर कार्रवाई — 698
गंभीर मामलों में — FIR और कानूनी कार्रवाई
698 SIM बंद, लेकिन कार्रवाई यहीं खत्म नहीं
महिलाओं और बालिकाओं को परेशान करने के मामलों में साइबर पुलिस ने अब तक 698 मोबाइल SIM ब्लॉक करवाए हैं। इन मामलों में शिकायत में सामने आए मोबाइल नंबरों की पहचान कर शिकायत के तथ्यों की जांच की जाती है। प्रथम दृष्टया शिकायत गंभीर और सही पाए जाने पर संबंधित मोबाइल SIM को बंद करवाने की कार्रवाई की जाती है। लेकिन साइबर पुलिस के लिए SIM बंद करना अंतिम कार्रवाई नहीं है। यदि मामला गंभीर है या लगातार हरैसमेंट, धमकी अथवा अन्य आपत्तिजनक गतिविधि सामने आती है, तो संबंधित मामले को स्थानीय पुलिस के पास भेजकर FIR दर्ज करवाने और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।
ग्राफिक्स | 698 SIM पर कार्रवाई

शिकायत सामने आई
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मोबाइल नंबर की पहचान
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शिकायत का सत्यापन
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तकनीकी/डेटा जांच
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SIM ब्लॉक कराने की कार्रवाई
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गंभीर मामला होने पर स्थानीय पुलिस को सूचना
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FIR और कानूनी कार्रवाई
छह-सात साल पुरानी शिकायतें भी अब रिकॉर्ड में महत्वपूर्ण
साइबर हरैसमेंट के कई मामलों की सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि पीड़ित महिलाओं या बालिकाओं को लंबे समय तक परेशान किए जाने की शिकायतें भी मिल रही हैं।
कुछ मामलों में छह-सात साल से लगातार फोन या अन्य माध्यमों से परेशान किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
ऐसे मामलों को साइबर पुलिस ने गंभीरता के आधार पर अलग कैटेगरी में रखने की प्रक्रिया अपनाई है। स्थानीय थाना पुलिस से शिकायत का सत्यापन कराया जाता है। आरोपों की पुष्टि होने पर आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज करवाने की कार्रवाई की जाती है।
इससे साफ है कि पुरानी शिकायतों को भी अब सिर्फ इसलिए नजरअंदाज नहीं किया जा रहा कि घटना काफी पुरानी है।
डेटा एंगल
लंबे समय से चल रही हरैसमेंट की शिकायतें भी जांच के दायरे में
बार-बार फोन करना
लगातार मैसेज भेजना
सोशल मीडिया पर पीछा करना
फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी
आपत्तिजनक टिप्पणी
मानसिक रूप से प्रताड़ित करना
एक नंबर, एक आरोपी और कई शिकायतें—डेटा से खुलेगा कनेक्शन
साइबर अपराध में आरोपी अक्सर अलग-अलग मोबाइल नंबरों और सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में किसी एक पीड़ित की शिकायत को अलग घटना मानकर छोड़ देने से आरोपी लंबे समय तक सक्रिय रह सकता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए स्टेट साइबर क्राइम स्तर पर शिकायतों का डेटाबेस तैयार कर उनका विश्लेषण किया जा रहा है।
पुलिस यह देखने का प्रयास कर रही है कि—
क्या एक ही नंबर से कई महिलाओं को परेशान किया गया?
क्या एक ही आरोपी के खिलाफ अलग-अलग जिलों से शिकायतें आईं?
क्या अलग-अलग शिकायतों में अपराध का तरीका एक जैसा है?
क्या एक ही व्यक्ति अलग-अलग नंबरों या सोशल मीडिया प्रोफाइल से सक्रिय है?
ऐसे मामलों को आपस में जोड़कर जांच आगे बढ़ाई जा सकती है।
यानी अब साइबर पुलिस की कार्रवाई ‘एक शिकायत-एक कार्रवाई’ तक सीमित नहीं है, बल्कि डेटा के जरिए अपराध के पूरे पैटर्न को समझने की कोशिश की जा रही है।
जयपुर से जिलों तक फैला साइबर एक्शन नेटवर्क
साइबर क्राइम पुलिस अधीक्षक सुमित मेहरडा के मुताबिक महिलाओं और बालिकाओं से जुड़े साइबर हरैसमेंट के मामलों में कार्रवाई सिर्फ जयपुर स्थित स्टेट साइबर क्राइम तक सीमित नहीं है।
जिलों में भी साइबर क्राइम से जुड़ी टीमें शिकायतों पर काम कर रही हैं। शिकायत मिलने के बाद उसका सत्यापन, मोबाइल नंबर और डिजिटल गतिविधियों से संबंधित जानकारी का परीक्षण तथा आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय थाना पुलिस को शामिल किया जाता है।
गंभीर मामलों में स्थानीय थाना पुलिस के स्तर पर FIR दर्ज करवाने की कार्रवाई की जाती है। वहीं स्टेट साइबर क्राइम स्तर पर प्राप्त शिकायतों के डेटा का विश्लेषण किया जाता है, ताकि अलग-अलग जिलों में सामने आए मामलों के बीच किसी तरह का कनेक्शन सामने आ सके।
ग्राफिक्स | तीन स्तर पर कार्रवाई
स्टेट साइबर क्राइम
डेटा एनालिसिस और पैटर्न की पहचान
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जिला साइबर टीम
स्थानीय सत्यापन और तकनीकी सहयोग
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स्थानीय थाना पुलिस
FIR और आपराधिक कार्रवाई
R4C के बाद डेटा आधारित साइबर कार्रवाई पर जोर
राजस्थान में R4C यानी राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर के गठन के बाद साइबर अपराधों की निगरानी और विश्लेषण की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह के निर्देशन में साइबर अपराध के अलग-अलग क्षेत्रों की पहचान कर उन अपराधों पर विशेष फोकस किया जा रहा है, जिनका सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है।
इसी क्रम में महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ मोबाइल और सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली हरैसमेंट को भी प्राथमिकता वाले मामलों में शामिल किया गया है।
अब साइबर अपराध से जुड़े मामलों में तकनीकी जानकारी और शिकायतों के डेटाबेस का इस्तेमाल केवल रिकॉर्ड रखने के लिए नहीं, बल्कि कार्रवाई की दिशा तय करने के लिए भी किया जा रहा है।
सोशल मीडिया की आजादी का गलत इस्तेमाल बना चुनौती
सोशल मीडिया ने लोगों के बीच संवाद को आसान बनाया है, लेकिन इसी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपराधी महिलाओं और बालिकाओं को डराने के लिए कर रहे हैं।
कभी फर्जी प्रोफाइल बनाकर संपर्क किया जाता है, कभी लगातार फोन और मैसेज किए जाते हैं और कई मामलों में निजी फोटो या वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर पीड़िता पर दबाव बनाया जाता है।
ऐसे मामलों का असर सिर्फ डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं रहता। लगातार धमकी और मानसिक उत्पीड़न पीड़ित के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
यही वजह है कि साइबर पुलिस ऐसे मामलों में समय पर शिकायत और डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने पर जोर दे रही है।
परेशान हैं तो चुप मत रहिए, 1930 पर शिकायत कीजिए
साइबर पुलिस ने महिलाओं और बालिकाओं से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति फोटो या वीडियो वायरल करने की धमकी देता है, लगातार फोन या मैसेज कर परेशान करता है अथवा सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करता है तो डरकर चुप न रहें।
ऐसे मामलों में साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की जा सकती है।
पीड़ितों के लिए जरूरी है कि धमकी वाले मैसेज, स्क्रीनशॉट, कॉल डिटेल से संबंधित उपलब्ध जानकारी, सोशल मीडिया प्रोफाइल या अन्य डिजिटल साक्ष्य को सुरक्षित रखें और उन्हें जल्द से जल्द पुलिस के सामने प्रस्तुत करें।
ग्राफिक्स | साइबर हरैसमेंट हो तो क्या करें?
फोटो-वीडियो वायरल की धमकी?
➡️ स्क्रीनशॉट/डिजिटल सबूत सुरक्षित रखें
बार-बार फोन या मैसेज?
➡️ नंबर और मैसेज की जानकारी सुरक्षित रखें
सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी?
➡️ प्रोफाइल/पोस्ट का रिकॉर्ड रखें
लगातार परेशान किया जा रहा है?
➡️ पुलिस को शिकायत करें
साइबर क्राइम हेल्पलाइन — 1930
698 SIM ब्लॉक से आगे बढ़ा साइबर पुलिस का एक्शन
महिलाओं और बालिकाओं को ऑनलाइन परेशान करने के मामलों में 5100 शिकायतों का रिकॉर्ड और 698 SIM पर कार्रवाई साइबर पुलिस के एक्शन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि साइबर पुलिस अब केवल शिकायत आने के बाद एक नंबर पर कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय शिकायतों के पूरे डेटाबेस को खंगालकर अपराध के पैटर्न को समझने पर जोर दे रही है।
एक नंबर से कई शिकायतें, एक आरोपी से जुड़े अलग-अलग मामले या एक जैसे तरीके से की जा रही हरैसमेंट—डेटा एनालिसिस के जरिए ऐसे कनेक्शन तलाशे जा रहे हैं।
पुलिस का संदेश साफ है—सोशल मीडिया के पीछे छिपकर महिलाओं और बालिकाओं को धमकाना या लगातार परेशान करना अब आसान नहीं होगा। जरूरत सिर्फ एक कदम उठाने की है। डर छोड़िए। चुप्पी तोड़िए। डिजिटल सबूत बचाइए। और साइबर अपराध की शिकायत 1930 पर कीजिए।