जयपुर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि सामाजिक संगठन जन-आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति के सबसे सशक्त माध्यम हैं। विकसित एवं उत्कृष्ट राजस्थान के निर्माण के लिए एनजीओ, सिविल सोसाइटी और उपभोक्ता मंचों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है, क्योंकि ये संस्थाएं सरकार की योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने वाली सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
मुख्यमंत्री रविवार को मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में आगामी बजट के मद्देनजर एनजीओ, सिविल सोसाइटी और उपभोक्ता फोरम के प्रतिनिधियों के साथ संवाद कर रहे थे।
सुशासन और सेवा के नए मानक
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार की दो वर्षों की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने ‘सेवा ही संकल्प’ के मंत्र पर चलते हुए सुशासन के नए मानक स्थापित किए हैं।
- ग्रामीण और शहरी सेवा शिविर: आमजन की समस्याओं के मौके पर निस्तारण के लिए विशेष शिविरों का आयोजन।
- स्वास्थ्य पहल: राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए नेत्र जांच शिविर और निःशुल्क चश्मे उपलब्ध करवाने जैसी मानवीय पहल।
- VB-G RAM 2025: मुख्यमंत्री ने ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025’ को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे मनरेगा में पारदर्शिता आएगी और ग्रामीण ढांचा मजबूत होगा।
विभिन्न संस्थानों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
संवाद के दौरान जालोर के दिव्यांग सेवा संस्थान, अर्पण सेवा संस्थान, कट्स, एसडब्ल्यूआरसी तिलोनिया, और सेंटर फॉर दलित राइट्स जैसी प्रमुख संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रतिनिधियों ने निम्नलिखित विषयों पर अपने सुझाव साझा किए:
- दिव्यांग एवं घुमंतू कल्याण: पुनर्वास केंद्रों का विस्तार और घुमंतू जातियों के लिए विशेष आवास योजनाएं।
- पर्यावरण संरक्षण: ग्रामीण क्षेत्रों में जल संचयन और हरित पट्टी विकास के लिए बजट प्रावधान।
- उपभोक्ता अधिकार: उपभोक्ता फोरम को और अधिक तकनीकी रूप से सुदृढ़ करना।
- स्वयं सहायता समूह: महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की मार्केटिंग के लिए जिला स्तर पर सेंटर बनाना।
जनकल्याणकारी फैसलों की सराहना
उपस्थित प्रतिनिधियों ने पिछले 2 वर्षों में राजस्थान सरकार द्वारा स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में लिए गए साहसिक निर्णयों की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि प्राप्त सुझावों का गहन विश्लेषण किया जाएगा और उन्हें आगामी बजट 2026-27 के नीति-निर्माण में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।
इस अवसर पर एसीएस (मुख्यमंत्री कार्यालय) अखिल अरोड़ा, एसीएस (ग्रामीण विकास) श्रेया गुहा और प्रमुख शासन सचिव (वित्त) वैभव गालरिया सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
