राजस्थान की राजनीति में जल्द ही एक बड़ा “पॉलिटिकल रीसेट” देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और संगठन महामंत्री बीएल संतोष के साथ हुई मैराथन बैठकों ने मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की अटकलों को पुख्ता कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, इन बैठकों में न केवल सरकार के कामकाज की समीक्षा की गई, बल्कि आगामी राज्यसभा चुनाव और लंबे समय से लंबित बोर्ड-निगमों में राजनीतिक नियुक्तियों पर भी सहमति बनने के संकेत मिले हैं। प्रदेश सरकार के ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले पार्टी अब संगठन और सरकार में नई ऊर्जा भरने के लिए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
वर्तमान में राजस्थान मंत्रिमंडल में कुल 24 मंत्री कार्यरत हैं, जबकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार यह संख्या 30 तक हो सकती है। रिक्त पड़े इन 6 पदों को भरने के लिए पार्टी इस बार नए और युवा चेहरों को प्राथमिकता देने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही, कई मौजूदा मंत्रियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट और फीडबैक के आधार पर उनके विभागों में भी फेरबदल की प्रबल संभावना है। पार्टी नेतृत्व का मुख्य फोकस उन चेहरों को आगे लाना है जो धरातल पर सक्रिय हैं और जिनकी छवि जनता के बीच सुशासन को मजबूती देने वाली है। माना जा रहा है कि इस बदलाव के जरिए क्षेत्रीय समीकरणों को भी दुरुस्त किया जाएगा।
बैठक का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव रहे। प्रदेश की तीन खाली हो रही सीटों में से भाजपा अपने संख्या बल के आधार पर दो सीटों पर जीत तय मान रही है। चर्चा है कि पार्टी “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए किसी महिला चेहरे या संगठन के समर्पित अनुभवी नेता को उच्च सदन भेज सकती है। इसके अलावा, राज्य के विभिन्न बोर्डों, आयोगों और अकादमियों में नियुक्तियों के जरिए उन कार्यकर्ताओं को साधने की कोशिश की जाएगी जो लंबे समय से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इन बदलावों के साथ भाजपा नेतृत्व 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले राजस्थान में “नई टीम-नई रणनीति” का संदेश देना चाहता है।
