NGT Strict on Illegal Mining in Rajasthan: अवैध खनन पर एनजीटी सख्त, ड्रोन तकनीक और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश

जयपुर: राजस्थान के नदी-नालों, ग्रामीण अंचलों और खनिज समृद्ध क्षेत्रों में लंबे समय से धड़ल्ले से जारी अवैध रेत व बजरी खनन के काले कारोबार पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने प्रदेशभर में पसरते अवैध खनन के जाल पर गहरी चिंता जताते हुए स्पष्ट किया है कि तमाम अदालती आदेशों और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के बावजूद अवैध खनन बेरोक-टोक जारी है और इससे निपटने में राज्य का मौजूदा निगरानी तंत्र पूरी तरह विफल साबित हुआ है।

मौजूदा निगरानी तंत्र को नकारा

न्यायिक सदस्य शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की दो सदस्यीय बेंच ने ‘नेशनल नेचर सोसायटी एवं अन्य’ से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश दिया। एनजीटी ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) और जिला स्तरीय प्राधिकरण (DEIAA) द्वारा अपनाई जा रही मॉनिटरिंग व्यवस्था को अपर्याप्त और नाकाम करार दिया है। बेंच ने रेत और बजरी खनन की पारदर्शी निगरानी के लिए एक विशेष और संशोधित तंत्र तुरंत स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।

एनजीटी के 5 प्रमुख निर्देश

पर्यावरण को पहुंच रही भारी क्षति को रोकने और खनन माफियाओं पर शिकंजा कसने के लिए एनजीटी ने निम्नलिखित पांच कड़े कदम उठाने को कहा है:

  • वाहन जब्ती और मुआवजा वसूली: अवैध खनन एवं परिवहन में संलिप्त पाए जाने वाले सभी वाहनों व मशीनों को तुरंत जब्त किया जाए और उनसे पर्यावरणीय क्षति के एवज में मुआवजे की वसूली तेज की जाए।
  • ड्रोन और जीआईएस तकनीक का प्रयोग: रेत व बजरी के वास्तविक भराव और खनन की मात्रा का सटीक आकलन करने के लिए ड्रोन तथा जीआईएस आधारित डिजिटल एप्लिकेशन का उपयोग किया जाए, जिससे पल-पल की लोकेशन ट्रैक हो सके।
  • अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही: जिस भी क्षेत्र में प्रशासनिक या खान विभाग के कर्मियों की लापरवाही से अवैध खनन पाया जाएगा, सरकार उन संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी (Personal Accountability) तय कर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करे।
  • पर्यावरण नुकसान का आकलन और पेनल्टी: जिन मामलों में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और अदालती कार्यवाही चल रही है, उनमें पर्यावरण को पहुंचे पारिस्थितिकी नुकसान का वैज्ञानिक आकलन कर भारी जुर्माना वसूला जाए।
  • बहु-स्तरीय ऑनलाइन निगरानी: पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद की प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए नियमित पर्यावरण लेखा परीक्षा (Environmental Audit) और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए खनिजों की खरीद-फरोख्त पर पारदर्शी नजर रखी जाए।

बनास, लूनी और चंबल जैसी नदी घाटियों में अवैध बजरी खनन लंबे समय से एक गंभीर पर्यावरणीय और सामाजिक मुद्दा रहा है। एनजीटी के इस सख्त रुख और अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय होने के बाद अब प्रशासनिक अमले पर नकेल कसने की उम्मीद जताई जा रही है।


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