टोंक। राजस्थान के बहुचर्चित देवली-उनियारा SDM थप्पड़ कांड से जुड़े मामले में नरेश मीणा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। कोर्ट की ओर से उनकी जमानत रद्द किए जाने के करीब 10 दिन बाद अब उनकी गिरफ्तारी के आदेश जारी किए गए हैं। कोर्ट ने पुलिस और संबंधित अधिकारियों को नरेश मीणा की गिरफ्तारी के साथ-साथ उनकी संपत्ति से संबंधित रिकॉर्ड जुटाने के निर्देश भी दिए हैं। इस पूरी कार्रवाई के लिए 6 अगस्त तक का समय दिया गया है।
नरेश मीणा की जमानत रद्द होने के बाद से ही इस मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज थी। अब कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस के सामने नरेश मीणा की गिरफ्तारी की कार्रवाई करने की चुनौती है। इसके साथ ही उनकी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड भी जुटाए जा रहे हैं।

10 दिन पहले रद्द हुई थी जमानत
मामले में कोर्ट ने करीब 10 दिन पहले नरेश मीणा को मिली जमानत को रद्द कर दिया था। इसके बाद उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ गईं। जमानत रद्द होने के बाद अब कोर्ट की ओर से गिरफ्तारी के आदेश जारी किए गए हैं। संबंधित पुलिस अधिकारियों को आदेश की पालना करते हुए आगे की कार्रवाई करनी होगी।
कोर्ट ने मामले में नरेश मीणा की संपत्ति का रिकॉर्ड भी मांगा है। माना जा रहा है कि पुलिस और प्रशासन की ओर से उनकी संपत्तियों से संबंधित जानकारी और दस्तावेज जुटाकर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके लिए 6 अगस्त तक की समय सीमा तय की गई है।

नवंबर 2024 में सामने आया था SDM थप्पड़ कांड
दरअसल, यह पूरा मामला नवंबर 2024 में देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान सामने आया था। मतदान के दिन समरावता गांव में निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा और तत्कालीन SDM अमित चौधरी के बीच विवाद हो गया था। इसी दौरान नरेश मीणा द्वारा SDM को थप्पड़ मारने का वीडियो सामने आया था। वीडियो वायरल होने के बाद मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया था।
नरेश मीणा का आरोप था कि ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर मतदान का बहिष्कार कर रहे थे और प्रशासन की ओर से उन्हें मतदान के लिए दबाव डाला जा रहा था। इसी मुद्दे को लेकर विवाद बढ़ा और नरेश मीणा तथा SDM के बीच कहासुनी हुई। इसके बाद थप्पड़ मारने की घटना सामने आई।
हालांकि, प्रशासन और पुलिस की ओर से इस मामले को कानून-व्यवस्था से जोड़कर कार्रवाई की गई। नरेश मीणा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
गिरफ्तारी के बाद बिगड़े थे हालात
नरेश मीणा की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद समरावता और आसपास के इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। प्रदर्शन के दौरान पथराव और आगजनी की घटनाएं भी सामने आई थीं। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
इस हिंसा के मामले में भी पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए और गिरफ्तारियां की थीं। SDM थप्पड़ कांड और इसके बाद हुई हिंसा से जुड़े मामलों में नरेश मीणा की भूमिका को लेकर भी कानूनी कार्रवाई जारी रही।
करीब आठ महीने जेल में रहे थे नरेश मीणा
SDM थप्पड़ कांड और इससे जुड़े हिंसा के मामलों के चलते नरेश मीणा को करीब आठ महीने जेल में रहना पड़ा था। इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर उन्हें जेल से रिहाई मिली थी। रिहाई के बाद उनके समर्थकों ने उनका स्वागत भी किया था।
जेल से बाहर आने के बाद नरेश मीणा ने कई मौकों पर अपने राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर सक्रियता दिखाई। हालांकि, अब जमानत रद्द होने के बाद एक बार फिर उनकी गिरफ्तारी का मामला सामने आया है।

संपत्ति रिकॉर्ड मांगने से बढ़ी कार्रवाई की गंभीरता
कोर्ट की ओर से गिरफ्तारी के आदेश के साथ नरेश मीणा की संपत्ति का रिकॉर्ड मांगा जाना भी इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संबंधित विभागों और अधिकारियों को उनकी संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड जुटाकर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
अब पुलिस की कार्रवाई पर नजर रहेगी कि नरेश मीणा की गिरफ्तारी कब और किस तरह की जाती है। वहीं 6 अगस्त की समय सीमा के भीतर कोर्ट के निर्देशों की पालना और संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड पेश किए जाने की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।
आगे क्या होगा?
जमानत रद्द होने और गिरफ्तारी के आदेश जारी होने के बाद अब नरेश मीणा के सामने कानूनी तौर पर नई चुनौती खड़ी हो गई है। पुलिस को कोर्ट के आदेश के अनुसार गिरफ्तारी की कार्रवाई करनी होगी। इसके अलावा संपत्ति का रिकॉर्ड कोर्ट में पेश किए जाने के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान सामने आया यह मामला पहले से ही राजस्थान की राजनीति में काफी चर्चा का विषय रहा है। अब गिरफ्तारी के नए आदेश और संपत्ति रिकॉर्ड मांगे जाने के बाद एक बार फिर नरेश मीणा से जुड़ा यह प्रकरण सुर्खियों में आ गया है।
