करौली। आज जहाँ पूरे देश और जिले में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की खुशियाँ मनाई जा रही हैं और नारी शक्ति के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं, वहीं करौली में बचपन को बाल श्रम की भट्टी में झोंकने की एक कड़वी तस्वीर भी सामने आई। इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए बाल अधिकारिता विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने बाल श्रम कर रही तीन नाबालिग बालिकाओं को रेस्क्यू किया।
संयुक्त टीम का बड़ा एक्शन
बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक पवन कुमार गुप्ता के निर्देशन में चाइल्ड हेल्पलाइन पर प्राप्त प्रकरण के आधार पर एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम में चाइल्ड हेल्पलाइन करौली, श्रम विभाग, मानव तस्करी विरोधी यूनिट (AHTU) और थाना कोतवाली करौली के सदस्य शामिल रहे। टीम ने शहर में छापेमारी कर बाल श्रम में लिप्त 03 नाबालिग बालिकाओं को निरुद्ध किया।
कार्रवाई में शामिल रही यह टीम
इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिस विभाग से ए.एस.आई. मुन्नी देवी, कांस्टेबल राजरानी और निर्मला ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं चाइल्ड हेल्पलाइन टीम से हिमांशु शर्मा, पवन कुमार जगा, सीमा चतुर्वेदी, राजेंद्र सिंह, नलेश कुमार बेरवा और हीरालाल जी मौजूद रहे।
CWC के समक्ष पेशी और काउंसलिंग
बालिकाओं के सर्वोत्तम हित और उनके अधिकारों को ध्यान में रखते हुए, टीम ने उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) के सदस्य दिलीप कुमार मीणा के समक्ष पेश किया। इस दौरान बालिकाओं के अभिभावकों को भी मौके पर बुलाया गया। समिति द्वारा अभिभावकों को बाल श्रम के दुष्प्रभावों के बारे में बताते हुए उन्हें बच्चों की शिक्षा के प्रति प्रेरित किया गया। साथ ही, भविष्य में बच्चों से बाल श्रम न करवाने हेतु कानूनी रूप से पाबंद भी किया गया।
