JLF 2026: साहित्य की ‘नई रामलीला’ बन रहे हैं पॉडकास्ट, विशेषज्ञों ने कहा- डिजिटल युग में कहानियों का बढ़ा क्रेज

जयपुर, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) 2026 में आधुनिक दौर में हिंदी साहित्य और डिजिटल माध्यमों के बदलते स्वरूप पर गहन चर्चा हुई। सत्र के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि जिस तरह सदियों पहले गोस्वामी तुलसीदास ने ‘रामलीला’ के जरिए साहित्य को जन-जन तक पहुँचाया था, आज वही भूमिका पॉडकास्ट निभा रहे हैं।

पॉडकास्ट: आँखों को आराम और कानों को कहानियों का सुकून

चर्चा में शामिल जयप्रकाश पांडे ने कहा कि पुस्तक व्यवसाय अब केवल ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लेखकों को नई पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बन चुका है। उन्होंने बताया कि कोविड काल के बाद ऑडियो पॉडकास्ट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। लोग स्क्रीन की थकान से बचने के लिए अब कहानियों को पढ़ना नहीं बल्कि सुनना पसंद कर रहे हैं, जिससे साहित्य की पहुँच ग्रामीण अंचलों तक भी बढ़ी है।

डिजिटल वर्ल्ड और स्क्रीन टाइमिंग की चुनौती

सत्र के दौरान डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और विशेषज्ञ अनुराग वर्मा ने युवाओं की ‘स्क्रीन टाइमिंग’ को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने “Gen-Z” (आज की युवा पीढ़ी) के बढ़ते मोबाइल यूसेज और स्क्रॉलिंग पैटर्न पर अपनी राय रखते हुए कहा:

  • टाइम लिमिट है जरूरी: अनुराग ने बताया कि वे स्वयं डिजिटल क्षेत्र से जुड़े हैं, फिर भी उन्होंने अपने लिए एक ‘टाइम लिमिट’ फिक्स कर रखी है। उन्होंने युवाओं को भी सलाह दी कि वे अपने स्क्रीन समय को नियंत्रित करें।
  • एल्गोरिथ्म और फेक कंटेंट: उन्होंने आगाह किया कि आजकल डिजिटल दुनिया ‘एल्गोरिथ्म’ के आधार पर चलती है। अक्सर वीडियो के थंबनेल और कैप्शन कुछ और होते हैं और अंदर का कंटेंट कुछ और, जिससे केवल ‘स्क्रॉल काउंट’ बढ़ाया जाता है। उन्होंने पाठकों को ‘फेक कंटेंट’ से सावधान रहने की सलाह दी।

साहित्य का भविष्य और डिजिटल प्रयोग

वक्ता अंजुम शर्मा ने बताया कि पॉडकास्ट में समय की पाबंदी न होना लेखकों के लिए वरदान है। उन्होंने 100 से अधिक लेखकों के इंटरव्यू के माध्यम से साहित्य को युवाओं के लिए रुचिकर बनाया है। वहीं, आरती जैन ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि 2020 से शुरू किए गए उनके हिंदी कहानियों के पॉडकास्ट को भारी समर्थन मिला है। उनका मानना है कि आने वाले समय में साहित्य सोशल मीडिया, लोक संगीत और फिल्मों के जरिए और भी व्यापक रूप में सामने आएगा।

प्रमुख बिंदु:

  • तुलना: पॉडकास्ट को आधुनिक दौर की ‘रामलीला’ बताया गया।
  • सावधानी: भ्रामक थंबनेल और कैप्शन वाले डिजिटल कंटेंट से बचें।
  • अनुशासन: डिजिटल दुनिया के ‘एल्गोरिथ्म’ को समझें और खुद की टाइम लिमिट तय करें।
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