जैसलमेर: फतेहगढ़ डिस्कॉम घोटाले में पहली गिरफ्तारी, आरोपी ने एईएन पर लगाए सवा लाख रुपये रिश्वत के आरोप

राजस्थान के जैसलमेर जिले में बहुचर्चित फतेहगढ़ डिस्कॉम घोटाले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। विद्युत चोरी निरोधक पुलिस ने नवंबर 2025 से फरार चल रहे मुख्य आरोपी भागे खां को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है।

सवा लाख की रिश्वत का दावा

पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी भागे खां ने कबूल किया कि उसने अवैध बिजली लाइन लगवाने और साल 2024 के सीजन में विद्युत सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने के लिए तत्कालीन सहायक अभियंता (AEN) अमित कुमार मीणा को कुल 1.25 लाख रुपये दिए थे। आरोपी के अनुसार, उसने 80 हजार रुपये अपने भाई रेशम खां के माध्यम से और 45 हजार रुपये सीधे एईएन को दिए थे।

7 अवैध कनेक्शन और लाखों का जुर्माना

मामले का खुलासा नवंबर 2025 में हुआ था, जब विजिलेंस की टीम ने फतेहगढ़ के कृषि नलकूपों पर छापेमारी की थी। इस दौरान 7 अवैध कनेक्शन पकड़े गए थे और मौके से 7 ट्रांसफार्मर जब्त किए गए थे। इन अवैध कनेक्शनों पर 1 लाख 77 हजार 366 रुपये का जुर्माना लगाया गया था, जिसे जमा नहीं कराने पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। आरोपी भागे खां तभी से फरार चल रहा था, जिसे अब पुलिस ने बाबर मगरा क्षेत्र से दबोच लिया है।

500 से अधिक अवैध कनेक्शनों का खेल

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि पिछले 4 वर्षों में एईएन और एआरओ ने मिलकर 500 से अधिक अवैध कृषि कनेक्शन जारी किए थे। इस खेल में विद्युत निगम की सरकारी सामग्री जैसे ट्रांसफार्मर, पोल और तारों का जमकर दुरुपयोग किया गया। इस मामले में तत्कालीन एईएन अमित कुमार मीणा, एआरओ राजकुमार मीणा और जेईएन हरीश जयपाल को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।

न्यायिक हिरासत में आरोपी

विद्युत चोरी निरोधक थाना जैसलमेर के थानाधिकारी रघुनाथ के अनुसार, आरोपी भागे खां को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे 15 दिन की न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य गैर-उपभोक्ताओं और बिचौलियों की तलाश कर रही है, जिनकी गिरफ्तारी जल्द होने की संभावना है।

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