जयपुर की सड़कों पर रोजाना लगने वाले लंबे जाम और ट्रैफिक की किच-किच से जनता को निजात दिलाने के लिए राजस्थान सरकार ने एक बड़ा मास्टर प्लान लागू करने का फैसला किया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ ट्रैफिक को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को हाई-टेक और स्मार्ट बनाना है।
इस नए ब्लूप्रिंट के तहत होने वाले 5 प्रमुख बदलाव निम्नलिखित हैं:
1. पुलिस अधिकारियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी
जमीनी स्तर पर निगरानी को मजबूत करने के लिए ट्रैफिक पुलिस के कुनबे को बड़ा किया गया है। अब हर इलाके में बड़े अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी।
| पद | पहले की संख्या | अब नई संख्या |
| एडीसीपी ट्रैफिक | 02 | 04 |
| एसीपी ट्रैफिक | 04 | 08 |
| ट्रैफिक इंस्पेक्टर | 15 | 20 |
2. ड्रोन से निगरानी और 72 ट्रैफिक बीट्स
अब ट्रैफिक पुलिस केवल चौराहों तक सीमित नहीं रहेगी। पूरे शहर को 72 ट्रैफिक बीट्स में बांटा गया है। इसके अलावा, आसमान से ड्रोन कैमरों के जरिए जाम वाली जगहों की पहचान की जाएगी। तंग गलियों में तुरंत पहुंचने के लिए पुलिस को 20 मॉडिफाइड मोटरसाइकिलें भी दी गई हैं।
3. टोंक रोड बनेगा ‘मॉडल कॉरिडोर’
योजना के पहले चरण में यादगार से सांगानेर तक की टोंक रोड को ‘मॉडल रोड’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ वैज्ञानिक तरीके से यू-टर्न सेट किए जाएंगे, अवैध कट्स बंद होंगे और फुटपाथों को पैदल चलने वालों के लिए अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा।
4. इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS)
जयपुर में अब ‘डायनेमिक’ ट्रैफिक लाइटें लगेंगी। यह सिस्टम गाड़ियों की भीड़ को सेंसर के जरिए भांप लेगा और जिस तरफ ज्यादा गाड़ियां होंगी, वहां की लाइट खुद-ब-खुद ज्यादा देर तक हरी रहेगी। इससे रेड लाइट पर बेवजह का इंतजार खत्म होगा।
5. अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर ‘जीरो टॉलरेंस’
सड़कों पर होने वाले अवैध कब्जों और गलत पार्किंग के खिलाफ सरकार अब सख्त रुख अपना रही है। शहर में अतिरिक्त क्रेनें तैनात की जा रही हैं और नो-पार्किंग जोन के बोर्ड स्पष्ट रूप से लगाए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
सरकार का मानना है कि इस ‘स्मार्ट सिस्टम’ और जनता के सहयोग से जयपुर को विश्वस्तरीय यातायात व्यवस्था वाला शहर बनाया जा सकता है। आने वाले कुछ महीनों में इन बदलावों का असर धरातल पर दिखने लगेगा।
