-फरारी के 14 महीनों में ही खान विभाग ने लुटाया खजाना, 10 गांवों के किसानों का भारी विरोध दरकिनार कर सौंपी ब्यावर में खनन की कमान
-SOG और ED की नाक के नीचे चल रहा था काली कमाई को खपाने का खेल, लुकआउट सर्कुलर जारी होने के बाद खनन साइट पर भारी छापेमारी
-लाखों बेरोजगार युवाओं का भविष्य बेचने वाले गिरोह का नया गठजोड़; क्या पेपर लीक के काले धन से ली गई थी 20 करोड़ की लीज
जयपुर। राजस्थान के सबसे बड़े परीक्षा घोटालों और वरिष्ठ अध्यापक व एसआई भर्ती सहित पेपर लीक के 10 संगीन मामलों में मुख्य आरोपी सुरेश ढाका पिछले 14 महीनों से पुलिस और जांच एजेंसियों की गिरफ्त से दूर है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि जहाँ एक तरफ पुलिस उसे ढूंढने में नाकाम रही है, वहीं दूसरी तरफ खान विभाग ने इस मोस्ट वांटेड भगोड़े के पिता मांगीलाल को ब्यावर में 20 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजरी खनन का ठेका सौंप दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने सिस्टम की मंशा, प्रशासनिक साठगांठ और भ्रष्टाचार के खूनी गठजोड़ पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
सुरेश ढाका, जिसकी तलाश में एसओजी (SOG) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पिछले चार साल से खाक छान रही हैं और जिस पर लाखों का इनाम घोषित है, उसकी फरारी के दौरान ही उसके परिवार को सरकार की ओर से यह बड़ी सौगात दी गई। ब्यावर के रायपुर स्थित गिरी नंदा बांध के पास दिए गए इस खनन ठेके पर महज दो महीने पहले ही काम शुरू हुआ था, जहाँ धड़ल्ले से भारी मात्रा में बजरी का अवैध स्टॉक खड़ा किया जा रहा था। मामले की भनक लगते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया, जिसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रकाश चंद शर्मा के नेतृत्व में एसओजी की विशेष टीम ने खनन साइट पर ताबड़तोड़ छापेमारी की।
-क्या पेपर लीक के काले धन को सफेद किया जा रहा था?
अब एसओजी इस बेहद गंभीर और संवेदनशील पहलू की पड़ताल कर रही है कि क्या लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य और उम्मीदों को बेचकर कमाए गए पेपर लीक के काले धन को इस 20 करोड़ के खनन ठेके में खपाया जा रहा था? क्या इस लीज के पीछे सुरेश ढाका की बेनामी संपत्ति लगी हुई है?
-10 गांवों के किसानों में भारी आक्रोश
जैसे ही इस क्षेत्र में खनन लीज दिए जाने की अधिकारिक सूचना सार्वजनिक हुई, वैसे ही स्थानीय स्तर पर इसका तीखा विरोध शुरू हो गया था। आसपास के करीब दस गांवों के किसान इस फैसले के खिलाफ पूरी तरह से लामबंद हो गए हैं। किसानों का साफ कहना है कि प्रशासन ने उनके विरोध और पर्यावरण की चिंताओं को पूरी तरह दरकिनार कर एक बड़े अपराधी के परिवार को यह आर्थिक फायदा पहुंचाया है।
क्रोनोलॉजी: ऐसे मेहरबान हुआ सिस्टम
-फरवरी 2024: खनन निदेशालय ने मेसिया गांव की 100 हेक्टेयर जमीन पर खनन के लिए ई-ऑक्शन निकाला।
-जुलाई 2024: मात्र 40 लाख रुपये की आरक्षित दर पर ई-निविदा आमंत्रित की गई, जिसमें ढाका कंस्ट्रक्शन ने अप्रत्याशित रूप से 20.05 करोड़ की बोली लगाई।
-अगस्त 2024: अतिरिक्त निदेशक (खान) ने तुरंत मंशा पत्र जारी कर दिया।
-दिसंबर 2025: करीब डेढ़ साल के भीतर 5 साल के लिए खनन पट्टा आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया।
एसओजी अब इस पूरे मामले में खान विभाग के अधिकारियों की भूमिका और सुरेश ढाका के वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुट गई है। सवाल यह उठता है कि जो अपराधी पुलिस रिकॉर्ड में ‘भगोड़ा’ है, उसका परिवार सिस्टम के भीतर इतना रसूखदार कैसे बना हुआ है?
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
