जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में मंगलवार को देशभर के विद्युत वितरण निगमों की 10वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ‘डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट-2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। राज्य सरकार के ऊर्जा विभाग और ‘इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विद्युत वितरण कंपनियों को वित्तीय रूप से सुदृढ़, तकनीकी रूप से उन्नत और उपभोक्ता-केंद्रित बनाना है। राजस्थान को पहली बार इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी का अवसर मिला है।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर और मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित कई गणमान्य अतिथियों ने संबोधित किया। कार्यक्रम में स्मार्ट मीटरिंग, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ग्रिड आधुनिकीकरण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण और उपलब्धियां
- अक्षय ऊर्जा में रिकॉर्ड वृद्धि: राजस्थान की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 45 गीगावाट और कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता 52 गीगावाट तक पहुंच गई है। पिछले 3 वर्षों से भी कम समय में इसमें 28 गीगावाट से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
- वित्तीय आत्मनिर्भरता: जयपुर डिस्कॉम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 931 करोड़ रुपये का शानदार मुनाफा अर्जित कर वितरण निगमों की आर्थिक मजबूती का उदाहरण पेश किया है।
- उपभोक्ता संतुष्टि: राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के त्वरित समाधान में जयपुर डिस्कॉम का संतुष्टि स्तर 82 प्रतिशत रहा।
- किसान बने ‘ऊर्जादाता’: पीएम कुसुम योजना के तहत 5,500 मेगावाट से अधिक की परियोजनाएं स्थापित, जिससे 3.75 लाख से अधिक किसानों को दिन में कृषि कार्यों के लिए बिजली मिल रही है।
स्मार्ट तकनीक से पारदर्शी होगी विद्युत वितरण व्यवस्था
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटरिंग, डेटा एनालिटिक्स, AI और ऑटोमेशन के प्रभावी उपयोग से वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और दक्ष बनाया जा रहा है।
ऊर्जा मंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि राज्य की नीतियों के कारण ही राजस्थान आज देश के प्रमुख सौर ऊर्जा केंद्र के रूप में उभरा है। इसके अतिरिक्त, ‘पीएम सूर्यघर योजना’ के तहत प्रदेश के 3.55 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं।
ऊर्जा क्षेत्र सुधार 2.0 और बैटरी स्टोरेज पर जोर
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने इसे नवाचारों और अनुभवों को साझा करने का एक बेहतरीन मंच बताया। उन्होंने कहा कि भारत के तेजी से वैश्विक आर्थिक ताकत बनने के साथ ही ऊर्जा की मांग भी लगातार बढ़ रही है। ‘विद्युत क्षेत्र सुधार 2.0’ के तहत वितरण निगमों को वित्तीय रूप से मजबूत किया जा रहा है। अजमेर डिस्कॉम के बाद अब जयपुर डिस्कॉम का मुनाफे में आना एक स्वागत योग्य कदम है।
उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा के प्रभावी एकीकरण के लिए वितरण नेटवर्क के आधुनिकीकरण, बैटरी ऊर्जा भंडारण और मांग के सटीक पूर्वानुमान पर विशेष बल दिया।
राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों का महामंथन
कार्यक्रम की शुरुआत में ऊर्जा विभाग की शासन सचिव आरती डोगरा ने स्वागत उद्बोधन दिया और आधुनिक तकनीक व नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग के महत्व को रेखांकित किया। इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम के प्रेसीडेंट रेजी कुमार पिल्लई ने भारत की प्रगति के लिए वितरण निगमों के सशक्तीकरण को आवश्यक बताया।
इस अवसर पर केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के चेयरपर्सन घनश्याम प्रसाद, एमपीसीएल के एमडी प्रेमकुमार, एआईडीए के महानिदेशक आलोक कुमार, पावर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक आरके त्यागी, जीयूवीएनएल की एमडी शालिनी अग्रवाल और इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम की सीईओ रीना सूरी ने भी अपने विचार रखे।

इस दो दिवसीय सम्मेलन में साइबर सुरक्षा, ऊर्जा भंडारण, शून्य कार्बन उत्सर्जन (नेट जीरो), डेटा सेंटरों और इलेक्ट्रिक वाहनों के कारण बढ़ती बिजली की मांग के प्रबंधन जैसे ज्वलंत विषयों पर देशभर के विशेषज्ञ अपनी कार्यप्रणालियां और व्यावहारिक समाधान साझा कर रहे हैं।